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नया वर्ष


चलो दूरियाँ अब दिलों से मिटाएँ
नये साल का दिन खुशी से मनाएँ

अगर मैं मनाऊँ नया साल अब से
नव वर्ष
तुम्‍हें मैं सुनाऊँ दबी बात मुख से

नहीं रेल से हादसा अब घटेगा
नहीं पास उस पार रावण जलेगा

नहीं घर जलेगा किसी का बमों से
न होगा कभी वास्ता मातमों से

नहीं बेटियों की कहीं चीख होगी
असरदार हर एक तारीख होगी

अमन हर तरफ सरहदों पर रहेगा
न इल्जाम फिर बेबजह का लगेगा

न्याायालयों के जजों की लड़ाई
न होगी सड़क पर सरेराह भाई

किताबी रहेगा न कानून अब से
बहेगा सड़क पर नहीं खून अबसे

नहीं वर्ग का दंश होगा विनाशक
न होगी प्रजा पागलों सी अराजक

नहीं अब वतन जातियों में बँटेगा
नया साल सच में इबारत लिखेगा

अगर ये सभी काम होंगे बरस भर
तभी मैं मनाऊँ नया साल खुलकर



-जगदीश शर्मा 'सहज' 
अशोकनगर म०प्र०

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