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नया नरक



नरक में जगह नहीं । बहुत पापी भर गए हैं । इस समस्या के समाधान के लिए  स्वर्ग लोक में एक बैठक हुई । यमराज ने कहा कि एक्सटेंशन जरूरी है । 

विष्णुजी ने कहा कि नरक का विस्तार नहीं हो सकता । हम जब भी स्वर्ग तथा नरक बनाते हैं यही सोच कर बनाते हैं कि नरक में कम लोग रहेंगे और ज्यादा लोग स्वर्ग आएंगे । फिर से लोगों का पुनर्जन्म होगा । इसीलिए यहां पर
नरक
नरक
कम भीड़ होगी । लेकिन अब एेसा कुछ नहीं हो रहा । लागातार नर्रक में लोगों की संख्या बढ़ रही है । भारी समस्या  है यह !

यमराज आप नरक में कम लोगों को जगह दीजिए । कुछ लोगों को स्वर्ग भी भेज दीजिए । जैसे परीक्षा में ग्रेस मार्क दिया जाता है यहां भी ग्रेस मार्क दे दीजिए ।

-इतने दिनों से वही तो कर रहा था प्रभु । जिन लोगों ने मर्त्य लोक में कुछ देवताओं के नामों का जाप किया था, तथा उनकी पूजा की थी उन्हें भी स्वर्ग ले आए । उदाहरण के तौर पर पूजा कमेटी के अध्यक्ष तथा सचिव को स्वर्ग ले आए । जिन लोगों ने सड़क के किनारे मंदिर बनवाए उन्हें भी स्वर्ग ले आए । भारत में जितने बाबा थे -आश्रम बनाकर प्रवचन दे रहे थे उन सभी को स्वर्ग ले आए । लेकिन यह लोग स्वर्ग में बहुत उत्पात मचा रहे हैं प्रभु । स्वर्ग के देवताओं की बात तो छोड़िए तपस्वी तथा ऋषिओं को  भी इनके व्यवहार से गुस्सा आ रहा है । यह लोग यहां एरोबिक्स करने लगे हैं । शाम को स्वर्ग में अप्सराएं शास्त्रीय नृत्य और संगीत परिवेषित करती  हैं और यह लोग उन्हें लाइन मारते हैं । यह लोग आइटम नम्बर पर डांस करते । रम्भा अगर नागिन डांस करेगी  तो क्या अच्छा लगेगा प्रभु ! इन्हें सोमरस दिया जा रहा है लेकिन यह ब्लैक डॉग ने की जिद कर रहे हैं । 

-ब्लैक डॉग ...काला कुत्ता...काला कुत्ता लेकर यह लोग क्या करेंगे ?

-प्रभु ब्लैक डॉग  काला कुत्ता नहीं बल्कि कीमती शराब है ।

-शराब या कुत्ता ?

-प्रभु सफेद घोडा, काला नाग इन सभी के नामों से शराब उपलब्ध है । यहां तक कि वृद्ध सन्यासी यानी ओल्ड मोंक  के नाम से भी शराब उपलब्ध है । 

-इंसान का कारोवार बहुत ही अजीब है । इंसान की मतिगति कुछ समझ नहीं आती ।

- फिर क्या किया जाए..? अगर नरक की  कुछ जगहों में थोड़ी सी फैसिलिटीज  बदल दी जाए तो...और बोर्ड लगा दिया जाए कि यह स्वर्ग-2 है । इतने में काम हो जाएगा ?

-मतलब ?

-अाजकल एयरलाइंस कम्पनियों ने प्रीमियम इकोनॉमी  क्लास की व्यवस्था है । प्रीमियम में इकोनॉमी  क्लास से कई सुविधाएं हैं । लोगों को लगता है कि वह प्रीमियम क्लास में बैठे हैं । इसीलिए अधिक पैसे देने को भी राजी हैं । एेसा कुछ यहां कर सकते हैं क्या ?

-नहीं प्रभु । यह धोखाधड़ी है । स्वर्ग में धोखाधड़ी ठीक नहीं । 

-तो फिर क्या करें ?

बैठक में भी मौैजूद देवता सभी चिंता में डूब गए । नारद सभीकी बातें चुपचाप सुन रहे थे । अब उन्होंने मुंह खोला । एक आइडिया है । 

-पृथ्वी को नरक बना दीजिए । 

-मतलब ?

-नरक में जो है , जो किया जाता है उन सभी की व्यवस्था पृथ्वी में कर दीजिए । लोग पृथ्वी में ही नरकवास कर लेंगे । इन सब के बावजूद जिसने अच्छा काम किया उसे स्वर्ग भेज दिया जाएगा । मरने के बाद फिर से यहां पुनर्जन्म कर दीजिए । जिंदा होते हुए भी नरक में और मरने के बाद भी नरक में । 

-विष्णु ने कहा येस देट इज ए गुड आइडिया । टोटल पृथ्वी को नरक बना दो । 

-उसके बाद से पृथ्वी को नरक बना दिया गया और हम सभी नरकवासी बन गए !


- मृणाल चटर्जी
अनुवाद- इतिश्री सिंह राठौर 



मृणाल चटर्जी ओडिशा के जानेमाने लेखक और प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं । मृणाल ने अपने स्तम्भ 'जगते थिबा जेते दिन' ( संसार में रहने तक) से ओड़िया व्यंग्य लेखन क्षेत्र को एक मोड़ दिया । इनका एक नाटक संकलन प्रकाशित होने वाला है। 

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