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हवालात में बंद है


एक बुढिया नेता के आगे गिड़गिड़ाते हुए -" नेता साहब, हमने तो अपना कीमती वोट देकर आपको कामयाब कर दिया है। अब आपकी मेहरबानी होगी कि मेरे बेटे को भी कहीं कामयाब करा दीजिए।

नेता साहब
नेता-"ठीक है कोई दुकान खोल लेगा, मैं कुछ सहायता कर दूँगा।" 

अगले ही दिन बुढ़िया का बेटा हवालात में था।

बुढिया पुनः नेता के पास जाती है , साहब मेरा बेटा हवालात में बंद है।

नेता-"क्या बात हुई ? हवालात में बंद कैसे है ?"

आपने कहा था कोई दुकान खोल लेना।

फिर, क्या हुआ ?

दुकान खोलते ही पुलिस पकड ले गई उसे।

किस चीज की दुकान खोली थी ?

"कपड़े की दुकान ।"

कपड़े की ! कैसे खोली थी ?

जी ,हथौड़े से ।





- अशोक कुमार ढोरिया

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