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ये साल नया



जीवन- स्तर जो पहले था ,अब भी है
जुमलों का केवल जाल नया
नया साल
परिवर्तन केवल चेहरों का दिखता है
फिर कैसे कह दें ,है ये साल नया

द्वेष , कलुषिता सब हैं मन में पाल रहे
हृदय- द्वार को कहो बुहारा किसने
मंदिर,मस्जिद ,गुरुद्वारे तो बहुत बन चुके
सन्मार्ग पर आकर कहो पुकारा किसने

उसी पुरानी धुन पर सब हैं नाच रहे
कहां सुनाई देता है कोई ताल नया

कितना भी आक्रोश लिए मन होता है
फिर- फिर चुनता ,कैसी -कैसी सरकार
कितने-कितने जादू दिखलाती है
क्या सचमुच है , ये कोई पीसी सरकार

जितने दिखलाने थे, सब तो दिखा चुके      
फिर कैसे कह दें, है ये माल नया .




-रावेल पुष्प 
नेताजी टावर ,
278/ए , एन.एस.सी.बोस रोड कोलकाता- 700047 
ईमेल : rawelpushp@gmail.com चलंतभाष : 9434198898

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