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नए साल का जश्न 


समय बहुत सुहावना था सब लोग उस बूढ़े जिसके जीवन में मात्र कुछ क्षण श्रेष्ठ थे को छोड़कर नए साल 2019 के
नए साल का जश्न
नए साल का जश्न 
स्वागत में व्यस्त थे. हर जगह नाच गाना हो रहा था बस कुछ ही घंटों में नया साल आने वाला था के काटे जा रहे थे. गाजर का हलवा बन रहा था पकोड़े बनाए जा रहे थे सबके मन में एक ही बात थी, नए साल के स्वागत में कमी नहीं होनी चाहिए.

तभी मै उस बूढ़े व्यक्ति के कमरे में गई इसलिये नहीं क़ी मै उसकी इस दशा से दुखी थी पर दिखावे के लिये क्योंकी दिखावा तो मानुष का सबसे बड़ा गहना है , उसे गले लगाया और बोली ,ओह वी  विल मिस यू 2018 कितने हैप्पी मोमेंट्स बताएं हैं मैंने तुम्हारे साथ याद है लास्ट ईयर कितना इंजॉय किया था ,यू वर सो स्पेशल।

2018 ने कहा, तो अब सबको क्या हो गया है ,मैं तो वही पुराना वाला 2018 हू किसी को मेरा ध्यान भी नहीं कुछ ही घंटों में मैं जाने वाला हूं और किसी को दुख ही नहीं... सब मेरे जाने का इंतजार कर रहे हैं,और इतना कहकर इसकी आंखों से झर झर आंसू गिरने लगे उसकी यह दशा देख मुझे थोड़ा बुरा लगा पर मै क्या करती यह नया साल होता भी तो चाइनीज मोबाइल जैसा है 1साल से ज़्यादा नहीं चलता ,उसकी मनोदशा देख मैंने कहा ओ गॉड तुम 1 साल  इन इंसानों के साथ रहे और फिर भी इन्हे समझ नहीं पाए वो बोला तुम कहना क्या चाहती हो .

मै तंज भरे स्वर में बोली वही जो तुमने अधिकतर घरों में देखा है बूढ़े  हो जाने पर और मतलब खत्म हो जाने पर यह मनुष्य जीवन में एक बार आने वाले माता-पिता को भी भूल जाते हैं ,फिर तुम तो "साल" हो इन्हें तुम्हारे जाने का दुख नहीं होगा 2018 क्योंकि अब तुम इनके किसी के काम के नहीं।मै उस समय मै दुसरो पर तंज ही कस सकती थी।2018 बोला क्या तुम मेरी ख्वाइश पूरी करोगी बाहर से बहुत ही स्वादिष्ट व्यंजनों की खुशबू आ रही है क्या मेरे लिए लेकर आओगी?मै मन ही मन सोचने लगी अंतिम समय चल रहा है पर बुड्ढ़े की जीभ का स्वाद नहीं गया ,खैर मैंने कहा नहीं 2018 उसे तुम नहीं खा सकते वह 2019 के स्वागत के लिए है।

अदिति मिश्रा
अदिति मिश्रा
2018 कुटिलता से मुस्कुराते हुए,यह 2019 में कितना भी कितना अहंकारी है मैंने उसे अपने पास बुलाया था ताकि मैं उसे बता सकूं कि मनुष्यों के  छलावे के बारे में ,कि कैसे यह पहली तारीख को इतना प्यार देते हैं और फिर कुछ ही दिनों में खून खराबा ,दंगे ,रिश्वत कर लेकर अनुचित कार्य कर के मेरे ऊपर काला धब्बा लगा देते हैं ।मेरी जिंदगी के अंतिम पलों का यह इंतजार कर रहे है ,यह सब मेरी मौत का जश्न बनाएंगे, सब बताना चाहता था 2019 को पर वह तो अपने ही घमंड में चूर है।मै बोली तुम अपना समय भूल गए क्या 2018? जब तुम आने वाले होगे 2017 ने भी तुम्हें अपने पास बुलाया होगा और तुम भी उससे मिलने नहीं आये होंगे ।2018 बोला हा मै अहंकार में अंधा हो गया था.

मैंने ज्ञानी की तरह कह तुम ही नहीं 2018 यहां हर कोई अहंकार मे अंधा है जो व्यवहार दूसरों के साथ करते हैं भूल  जाते हैं कि समय उनका भी आएगा और उनके साथ भी ऐसा ही होगा।इतने में ही मैंने देखा की घड़ी की सुई 11:58 की ओर जा रही है और कहा ,2019 कुछही मिन्टो मे आने वाला है, मैं चलती हूं ।2018 बोला रुक जाओ मेरे जन्म के समय तुम मौजूद थी तो आखिरी पलों में मुझे छोड़ कर क्यों जा रही हो, मै बोली नया साल आ रहा  है , हालांकि मै जानती थी की यह नया साल एकता कपूर के सीरियल की अनगिनत कडीयो की तरह होता है हर बार लगता है कुछ नया आयेगा पर सब कुछ वोही होता है.  पर मैं अब जाना चाहती थी क्योंकी अब उसकी दशा मै नहीं देख पा रही थी और गीता का श्लोक मेरे दिमाग मे चल रहा था "जातस्त हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं" जिसका अर्थ था जन्म लेने वाले के मृत्यु निश्चित है... पर उसको केसे समझाती।

रात्रि के 12:00 बज चुके थे पटाखे फूट रहे थे, के कट रहे थे 2018 जा चुका था उसका किसी का ख्याल भी नहीं था,पता नहीं 2019 के आने का जश्न मनाया जा रहा था यह 2018 की मौत का।





-अदिति मिश्रा


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