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ठग्स ऑफ हिंदोस्तान Thugs of Hindostan  



ठग्स ऑफ हिंदोस्तान Thugs of Hindostan  - हाल ही में एक फिल्म रिलिज हुई है 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' । इसमें हिंदी सिनेमा के किवंदंती अभिनेता अमिताभ बच्चन और मिस्टर परफेक्‍शनिस्‍ट आमिर खान है । कैटरिना और फातिमा  सना  शेख  भी अहम भूमिकाओं में हैं ।इस फिल्म में दो बड़े-बड़े जहाज हैॆं । यह कहा जा रहा है किसी भी हिंदी फिल्म में इतने बड़े जहाज का
ठग्स ऑफ हिंदोस्तान
ठग्स ऑफ हिंदोस्तान
फिल्मांकन कभी नहीं हुआ । फिल्म का निर्द्देशन विजय कृष्ण आचार्य ने किया है । वह वर्तमान समय के नामचीन निर्द्देशकों में से एक हैं । धूम-3 का भी निर्द्देशन उन्होंने किया था । यह फिल्म बहुत अच्छी कमाई करने की उम्मीद थी लेकिन सिनेमाप्रेमियों को इस फिल्म ने निराश किया है । ज्यादातर दर्शक यही कहते नजर आ रहे हैं कि  फिल्म 'ठग्स आफ हिंदोस्तान' ने हमें ठग दिया । इसकी कहानी बहुत ही कमजोर है । स्क्रिनप्ले भी कुछ खास नहीं । एक भी गाना कानों को नहीं भाता । भव्य सेट के अलावा फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं है ।

अच्छा हम फिल्म की समीक्षा नहीं करना चाहते । उस फिल्म में क्या है क्या नहीं आप खुद ही जाकर देखिए । अच्छा-बुरा खुद ही विचार कीजिए । किसी को अच्छा-बुरा कहने का जिम्मा हमने नहीं उठाया है !

हम यहां नवघन के बारे में बात करते हैं । नवघन फिल्म देखने के बाद दुखी होकर बैठा था । उसे दुसरों ने पूछा कि क्या हुआ नवघन...क्यों उदास हो ? नवघन ने जवाब दिया- 'ठग्स आफ हिंदोस्तान' ने हमें ठग दिया । क्या सोचकर गया था और क्या हो गया । 
-क्या सोच कर गए थे...?
-अरे...मैंने सोचा था कि इस फिल्म में ठगों के बारे में बताया जाएगा । विजय माल्या, नीरव मोदी अथवा उनसे पहले भी जो ठगी के लिए बदनाम हुए थे उन पर फिल्म बनाई जाएगी । एक समय था नटवर लाल ने ठगी में बड़ा नाम किया था । उसे लेकर एक सिनेमा भी बनाया गया है । लेकिन यहां तो बात कुछ अलग ही है । 
वहां मौजूद एक शख्स ने कहा- यहां ठग मतलब लुटेरों की बात हो रही है । कुछ लोग मिलकर अंग्रेजों को लूटते थे । अंग्रेजों ने बहुत प्रयासों के बाद उनका निपात किया था । इसीलिए ठगों में अच्छे-बुरे दो तरह के ठग हैं । 
-हां । अब मुझे लग रहा है कि फिल्म देखने से पहले मुझे इतिहास पढ़ना होगा । उसके बारे में जानना होगा ।
-नहीं इतनी तकलीफ उठाने की जरूरत नहीं है । सिनेमा को कहानी की तरह समझो । और उसे देखकर अपना मनोरंजन करो । वो ही सबसे अच्छा तरीका है । 
-हां वह भी सही है ।
-नवघन कुछ समय एकांत में कुछ सोचने लगा । चाय की चुस्की लेते हुए उसने कहा, हां यही सबसे अच्छा रास्ता है । अगर एेसा हो तो विवाद ही न हो । जैसे 'पद्मावति' को लेकर कितना विवाद हुआ था । 'पद्मावति' को 'पद्मावत' भी कर दिया लेकिन विवाद थमा ही नहीं । उसके बाद क्या हुआ पता नहीं सभी ने चुप्पी साध ली । और अब देखिए इटली में अलाउद्दीन खिलजी और पद्मावति की शादी भी हो गई । दोनों ने मुम्बई के जुहू बीच में घर भी खरीदा है ।
नवघन ने रामबाबू से पूछा- अच्छा ! आपने यह फिल्म देखी है ?
रामबाबू ने कहा- देख भाई ! परदे के बाहर मैं रोज इतने ठगों को देख रहा हूं कि और पैसे खर्च कर ठगों को देखने का  मन नहीं है और न ही कोई शौक है । भारत में जहां देखों वहां ठगों की भरमार है । 
नवघन ने कहा -ठीक कहा आपने । अगर बात इतनी ही सिंपल है तो इस फिल्म का इतना लंबा नाम रखने की क्या आवश्यकता थी । 'ठग्स आफ हिंदोस्तान' के बदले सीधा 'नेता' ही रख दिया होता । बात तो एक ही है । 
नवघन ने जो सोच कर यह बातें कही वही बातें शायद सिनेमा का पोस्टर लगाने वाले आदमी के दिमाग में चल रही थी इसीलिए उसने चुन-चुन कर नेताओं के घर के सामने 'ठग्स आफ हिंदोस्तान' के पोस्टर लगा दिए हैं ।  


- मृणाल चटर्जी
अनुवाद- इतिश्री सिंह राठौर



मृणाल चटर्जी ओडिशा के जानेमाने लेखक और प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं ।मृणाल ने अपने स्तम्भ 'जगते थिबा जेते दिन' ( संसार में रहने तक) से ओड़िया व्यंग्य लेखन क्षेत्र को एक मोड़ दिया । इनका एक नाटक संकलन प्रकाशित होने वाला है। 

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