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प्यार ना करने की कसम



ग़मों से अपनी मुलाकात है मौत से अपनी दोस्ती .
जब से अंधेरों को अपनाया उजालों की दुनिया रो पड़ी .

इक मोहब्बत का चिराग तुम मेरी लाश पर रख जाना .
कुछ बातें प्यार की कह दो जहाँ चाहे चली जाना ..

हमें जिंदगी पर नहीं मौत पर एतबार हो गया .
मोहब्बत
प्यार ना करने की कसम उठा ली बेवफा यार हो गया ..

हमें जिन्दा देखकर हैरान हैं मेरे दुश्मन .
यादों का सहारा लेकर मौत बनके आई है दुल्हन ..

ऐसा गिरा मैं जिंदगी में उठाने वाला न मिला .
सभी ठोकर मारते चले गए बचाने वाला न मिला ..

तुम शिकायत बता देते तो ये क़यामत न आती .
अगर तुम इनायत कर देते तो ये आफत ना आती ..

इश्क के पुजारी हैं लोग कहते हैं धरमात्मा .
तेरे सामने ही सर झुकाते हैं तुम्हे समझते हैं परमात्मा ..

हम नशा करने वालों की बस इतनी खराबी है .
कि लोग हमें नफरत से कहते शराबी हैं ..

बढ़ रहे थे मंजिल की तरफ सनम से कांटे बिछा दिए .
जलाये थे जो मोहब्बते - चिराग वो चिराग बुझा दिए ..

चक्कर लगाते थे हम तुझे देखने के लिए .
आधी जिंदगी रह गयी शराब में डूबने के लिए ..

वीरानों में ले चलो हमें तुम ,हम महफ़िलों में घबराने लगे हैं .
जो मोहब्बते - जाम हमारे लिए बने थे ,वो गैरों को पिलाने लगे हैं ..

तेरे लिए दुआ माँगते हुए ,खुद मौत के करीब आ पहुँचा .
क्या होगा अंजामे मोहब्बत ,बेदर्दी ने इतना भी न सोचा ..



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