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तेरी चाहत में मरने का इरादा है



रोया करोगी तुम अपनी बेवफाई याद करके .
पिया करोगी मेरी तरह आंसुओं के जाम भर भरके ..

जीते जी मेरे होंठों पे सनम न नाम होगा .
मैं तो बहुत हो चुका अब तू भी बदनाम होगा ..
तेरी चाहत में मरने का इरादा है

तमाशाई है दुनिया तमाशाई हैं लोग .
बेवफाई के हाथों हम मरते हैं रोज ..

ये मेरी शराफत थी सब कुछ सहकर भी चुप रहा .
कुछ कुसूर आपका भी था बदनाम सिर्फ मैं हुआ ..

काँप गयी जिंदगी काँप गयी मेरी आत्मा .
अपना मिलन कब कराएगा परमात्मा ..

डंस गयी एक हसीं बुलबुल दम निकलना बाकी है .
जहर फ़ैल गया अंग अंग में असर ही करना बाकी है ..

चलते हुए मंजिल पर पहुँचे तो दरवाजा बंद मिला .
दरवाजा खोलकर अन्दर पहुँचे तो अन्दर गम ही गम मिला ..

क्या होता है दिले प्यार ये जान न सके यार .
अब तो जिंदगी में रह गया बस उनका इंतज़ार ..

एक एक जाम करके हम कई बोतले पी गए .
ताज्जुब है उनको फिर भी हम कैसे जी गए ..

किस किनारे से लगे हम हर किनारे पे मौत खड़ी है .
जीना दुश्वार हो गया हमारा जबसे आँखें लड़ी हैं ..

तुम्हे क्या मालूम हम कितने बेचैन हैं ,तुम्हे पाने के लिए .
अब तो मेरे पास कोई बहाना भी न रहा ,दुनिया छोड़ जाने के लिए ..

हमसे करके दगा मेंहदी खून की रचाई .
लाल हाथ करके चला है देखो हरजाई ..

मजबूर नहीं लाचार नहीं हम तो इश्क के मारे हैं .
बहता है जो पानी हर पल देखो ये अश्क हमारे हैं ..

हम जानते हैं हमारे दुश्मन बहुत ज्यादा हैं .
फिर भी तेरी चाहत में मरने का इरादा है.


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  1. ये इश्क कितना कम्बखत है मेरे दोस्त कब तुमसे प्यार हुआ ये आभास न हुआ,
    गम तुम्हे ही नहीं मिले हैं जिन्दंगी में, हम भी कब देवदास बने ये अहसास न हुआ I
    राजेन्द्र कुमार शास्त्री `गुरु `

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