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विंध्यवासिनी स्त्रोत 
vindhyeshwari stotram 

विंध्यवासिनी स्त्रोत vindhyeshwari stotram श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्र विन्ध्येश्वरी स्तोत्र की महिमा जगत विखाय्त है .इस स्तोत्र का पाठ करने माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है .व्यक्ति धन ,स्वास्थ्य , सुख, समृद्धि, सौभाग्य और मोक्ष प्राप्त करता है .इसीलिए मनुष्य को विन्ध्येश्वरी स्तोत्र का पाठ प्रातः काल करना चाहिए .जिससे माँ दुर्गा प्रसन्न हों .

श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्र


निशुम्भ-शुम्भ-गर्जनीं, प्रचण्ड-मुण्ड-खण्डिनीम् ।
वने रणे प्रकाशिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥

त्रिशुल-मुण्ड-धारिणीं धरा-विघात-हारिणीम् ।
माँ दुर्गा
माँ दुर्गा
गृहे-गृहे निवासिनीं भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥

दरिद्रदुःख-हारिणीं, सदा विभुतिकारिणीम् ।
वियोग-शोक-हारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥

लसत्सुलोल-लोचनं लतासनं वरप्रदम् ।
कपाल-शुल-धारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥

कराब्जदानदाधरां, शिवाशिवां प्रदायिनीम् ।
वरा-वराननां शुभां भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥

ऋषिन्द्रजामिनीप्रदां, त्रिधा स्वरूप-धारिणीम् ।
जले स्थले निवासिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥

विशिष्ट-शिष्ट-कारिणीं, विशाल रूप-धारिणीम् ।
महोदरे विलासिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥

पुरन्दरादि-सेवितां पुरादिवंशखण्डिताम् ।
विशुद्ध-बुद्धिकारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥

॥ इति श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्र सम्पूर्ण ॥



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