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नेल्सन मंडेला
Nelson Mandela Life Essay in Hindi


नेल्सन मंडेला बायोग्राफी Nelson Mandela Life Essay in Hindi नेल्सन मंडेला भारत रत्न नेल्सन मंडेला पुरस्कार नेल्सन मंडेला हिस्ट्री नेल्सन मंडेला पुस्तकें नेल्सन मंडेला कौन थे नेल्सन मंडेला दिवस नेल्सन मंडेला को भारत रत्न - बीसवीं शताब्दी के दौरान विश्व में अनेक सकारात्मक और अनुकूल परिवर्तन देखने को मिले . उनमें से एक था दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की निति का अंत .यह महान परिवर्तन नेल्सन मंडेला के अथक प्रयासों और त्यागों के बिना कदापि संभव नहीं था . वे हमारे समय के महान व्यक्तित्व थे .वास्तव में एक सच्चे देशभक्त नेल्सन मंडेला अपने देश में घर - घर जाने वाले व्यक्ति हैं .वे ऐसे संभावित व्यक्ति हैं जिन्हें दुनिया के लाखों ऐसे लोग आदर देते हैं जो स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा में विश्वास रखते हैं . 

सरकार का अत्याचार - 

अफ्रीका बहुमूल्य खनिजों जैसे प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध हैं .इसकी जलवायु अनुकूल और भूमि उर्बर है . किन्तु देश की अधिकांश संपत्ति पर अल्पसंख्यक गोरे लोगों का ही अधिपत्य था जिन्होंने इस देश
नेल्सन मंडेला
नेल्सन मंडेला
पर अनेक वर्षों तक राज किया था .अफ्रीका के मूल निवासी न केवल अपने मौलिक अधिकारों से वंचित थे बल्कि उन्हें अपनी भूमि पर गरिमापूर्व ढंग से जीने की भी आजादी प्राप्त नहीं थी . जो लोग विरोध में आवाज उठाते थे अथवा अपने अधिकारों के लिए माँग करने का साहस करते थे ,उनका अल्पसंख्यक सरकार बड़ी बेहरहमी से दमन कर देती थी .

नेल्सन मंडेला का जीवन परिचय - 

मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को म्वेज़ो, ईस्टर्न केप, दक्षिण अफ़्रीका में हुआ .उनके पिता का नाम  गेडला हेनरी म्फ़ाकेनिस्वा और माता का नाम  नेक्यूफी नोसकेनी था .मंडेला ने प्रारम्भिक शिक्षा क्लार्कबेरी मिशनरी स्कूल से प्राप्त की .1944 में वे अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गये जिसने रंगभेद के विरूद्ध आन्दोलन चला रखा था।इसी वर्ष उन्होंने अपने मित्रों और सहयोगियों के साथ मिल कर अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की।उन्होंने जेल में लम्बा जीवन कैदी के रूप में बिताया .जीवन के 27 वर्ष कारागार में बिताने के बाद अन्ततः 11 फ़रवरी 1990 को उनकी रिहाई हुई।१९९४ में आप दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बने .१९९७ में नेल्सन ने सक्रीय राजनीति को अलविदा कह दिया .5 दिसम्बर 2013 को फेफड़ों में संक्रमण हो जाने के कारण मंडेला की हॉटन, जोहान्सबर्ग स्थित अपने घर में मृत्यु हो गयी।दक्षिण अफ्रीका के लोग मंडेला को व्यापक रूप से "राष्ट्रपिता" मानते थे।उन्हें भारत सरकार ने भी देश का सबसे बड़ा पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया .मंडेला की लिखी हुई पुस्तक "लॉन्ग वाक टू फ्रीडम" बहुत प्रसिद्ध है . 

नेल्सन मंडेला का जीवन संघर्ष -

नेल्सन मंडेला ने रंगभेद की इस अमानवीय निति के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजा दिया और लम्बे समय तक अफ्रीका के मूल निवासियों का इस संघष में नेतत्व किया . १९१० में अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेश की स्थापना की गयी .किन्तु सरकार ने इस आन्दोलन को दबाने के लिए आतंक का सहारा लिया . प्रदर्शनकारियों का कत्लेआम किया गया और अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेश पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया . 

मानवता को नयी राह -

इसके बावजूद इस बीच दुनिया के कई देशों ने अफ़्रीकी संघर्ष का समर्थन किया और अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेश पर लगाया गया प्रतिबन्ध हटा लिया गया . नेल्सन मंडेला को जेल से रिहा कर दिया गया .रंगभेदी कानून हटा दिए गए और एक नया संविधान बनाकर लागू किया गया .आम चुनाव कराये गए जिसमें काले लोगों की सरकार सत्ता में आई . इस महान देशभक्त और स्वंतत्रता सेनानी ने सत्ता की बागडोर अपने अनुनायियों के हाथों में सौंप दी है और अपनी आजादी को सार्थक करते हुए मानवता को नयी राह दिखाई है . 


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