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जादुई गिलास की कहानी  


जादुई गिलास की कहानी  - एक था हेनरिक .वह गरीब था, मगर दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहता था .एक दिन उसे गाँव में सबसे बूढ़े व्यक्ति - झील के उस प्यार पहाड़ी पर एक बौना रहता है . उसके पास एक जादुई गिलास है . गिलास हर इच्छा पूरी कर सकता है .

सर्दी के दिन थे . हेनरिक ने अपना कोट पहना ,जूते पहने और झील के पास पहुँचा गया . ठण्ड के कारण झील का पानी जम गया था .हेनरिक झील पार करके पहाड़ के पास पहुँचा .अचानक उसे किसी ने पुकारा - "हेनरिक ."

जादुई गिलास
जादुई गिलास
हेनरिक हैरान ! इस अनजान प्रदेश में ऐसा कौन है , जो उसे जानता है .उसने इधर - उधर देखा .कुछ दूर उसे एक बौना दिखाई दिया . बौना उसे अपनी झोपड़ी में ले गया . उसे वहाँ बैठाकर एक गिलास में शरबत ले आया और कहने लगा - हेनरिक ! तुम बहुत दूर से आये हो . लो यह शरबत पियो . सारी थकान दूर हो जायेगी .

हेनरिक ने शरबत का गिलास पकड़ा. वह उसे पीना ही चाहता था कि शरबत की एक बूँद उसके पैर के अंगूठे पर गिर पड़ी .अंगूठे का वह भाग पत्थर जैसा हो गया . हेनरिक को समझते देर न लगी कि वह बौना शर्बत पिलाकर उसे पत्थर का बनाना चाहता है .

तभी हेनरिक को न जाने क्या सूझी ,वह गिलास के साथ वहाँ से उठकर भाग निकला .

ठहर जा ! तू मेरा जादुई गिलास लेकर इतनी आसानी से भाग नहीं सकता . मैं पत्थर बन कर तुझे कुचल दूँगा . बौने से उसे ललकारा .

अचानक हेनरिक ने पत्थर के लुढ़कने की आवाज सुनी . पत्थर बना वही बौना तेज़ी से उसके पीछे लुढ़कता आ रहा था .

इसी बीच उसे दाई ओर खड़ा एक पेड़ दिखाई दिया . वह दौड़कर उस पर चढ़ गया .पत्थर ढलान पर लुढ़कता हुआ तेज़ी से झील में जा गिरा . झील के ऊपर जमी बर्फ टूटी और पत्थर बना बौना झील में समा गया .


कहानी से शिक्षा -
  • व्यक्ति को अपनी बुद्धि से काम लेना चाहिए . 
  • शत्रु कितना भी बलशाली क्यों न हो ? घबराना नहीं चाहिये . 

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