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गरीब


मैं हजूर गरीब हूं । सरकारी योजनाओं का लाभ उठाता हूं ।एक रूपये वाला चावल खाता हूं ।क्यों न लाभ उठाऊं भला ...! मेरे लिए ही तो यह योजनाएं बनाई गई हैं । हर साल कईं नई परियोजनाओं की शुरुआत होती है ।जन्म से पहले 'ममता योजना' से लेकर मौत के बाद 'हरिशचन्द्र योजना' तक मेरा जीवन योजनाओं की मोहताज है ।
गरीब
गरीब
मध्याह्न भोजन है , मुफ्त में पढ़ाई की सुविधा भी है । मुफ्त में बही, खाता पेंसिल सबकुछ है । अब कहीं पर सुना है कि मुफ्त में मोबाइल भी दिया जाएगा । लैपटाप तो दिया ही जा रहा है । मुफ्त में घर । मुफ्त में बिजली । कोई भी सरकार सत्ता में आए फायदा तो मेरा है । मेरे लिए अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन दिए जाते हैं ।

लेकिन विडंबना तो देखिए... देश की आजादी के सात दशक बित गए मैं गरीब जहां था वहीं हूं ।गरीबों की संख्या कम ही नहीं हो रही । पहले भी मां और बच्चे खानाबदोशों की तरह बाहर घूमते थे और आज भी घूम रहे हैं ।तब गांवों में घूमते थे अब दंडमुक्त स्कूल में मध्याह्न भोजन खाकर पान की दुकानों में अड्डा जमाते हैं । चाहे दिमाग में कुछ न हो पास होना तय है । गांव में न सही गांव के पास कालेज है । वहां दाखिला लेते हैं चाहे ज्ञान मिलें या न मिलें...
मैं तब भी गरीब था । मैं अब भी गरीब हूं । पता नहीं क्यों नहीं सुधरती यह हालत मेरी...

स्वप्न
मेरा एक दोस्त था जिसका नाम था स्वप्न । वक्त-बेवक्त वह मेरे पास आ जाया करता था । घंटों तक मेरे पास बैठता था । कभी-कभी तो मुझे मेरा काम भी करने नहीं देता था वह। वक्त के साथ उसका आना कम हो गया । अब कभी-कभी अपनी एक झलक दिखाकर चला जाता । मैं कहता-मेरे पास बैठ । वह बिना कुछ बोले बस मुस्कुरा कर चला जाता । मुस्कुराहट हमेशा खुशी की निशानी नहीं होती । दर्द में भी लोग मुस्कुराते हैं । वह मुस्कुराहट आंसू से भी अधिक पीड़ा दायक होती है । कईं साल हो गए और स्वप्न के साथ मेरी मुलाकात नहीं होती । कईं बार उसकी याद भी नहीं आती । पता नहीं कहां चला गया वह !

धारा 377
1970 में गीतकार नीरज ने एक गाना लिखा था -'आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं' । मुकेश ने गाने को अपनी आवाज दी थी । सुप्रीम कोर्ट को 48 साल लगे इसे वैध घोषित करने में । 
इस फैसले के बाद कुछ लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा । उनमें से शादी में मुफ्त में खाने वाले लोग भी शामिल हैं । अगर एेसा कोई आदमी शादी में मुफ्त खाना खाने पहुंचा और किसी  रिश्तेदार ने  पूछ लिया कि आपको सही तरह से  पहचान नहीं पाया । आप लड़की वालों की तरफ से हैं या लड़के वालों की तरफ से ?
उसका जवाब  - लड़की वालों की तरफ से ।
रिश्तेदार का जवाब आएगा-
झूठा । मक्कार । मुफ्त में खाने चला आया । यहां किसी लड़का-लड़की की शादी नहीं हो रही बल्कि दो लड़कों की शादी हो रही है । 



मृणाल चटर्जी ओडिशा के जानेमाने लेखक और प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं ।मृणाल ने अपने स्तम्भ 'जगते थिबा जेते दिन' ( संसार में रहने तक) से ओड़िया व्यंग्य लेखन क्षेत्र को एक मोड़ दिया ।इनका एक नाटक संकलन प्रकाशित होने वाला है . 

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