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तुम्हें भी तलाश है


क्या मैं जो महसूस कर रहा हूं,
क्या वो तुम्हें भी एहसास है।
क्या मैं जो ढूँढ रहा हूं,
क्या वो तुम्हें भी तलाश है।
क्या मैं जी कर थक रहा हूं,
क्या वो तुम्हें भी हरास है।
तलाश
क्या मैं जिसके लिए बेमुल्य हूं,
क्या वो तुम्हारे लिए खास है।
क्या मैं जो खो चुका हूं,
क्या वो तुम्हारे लिए आश है।
क्या मैं टूट -टूट कर जीवन हूं,
क्या वो तुम्हारे लिए साँस है।
क्या मैं जिसे छुकर जाता हूं,
क्या वो तुम्हारा लिबाश है।
क्या मैं जो कुचला जाता हूं,
क्या वो तुम्हारे पैरोें की घास है।
क्या मैं पत्थर का गढा जो मूरत हूं,
क्या वो तुम्हारा शिद्दत तराश है।
क्या मैं जिसके लिए अलग हूं,
क्या वो ही तुम्हारे पास है।
क्या मैं जिसका रिश्ता हूं,
क्या वो तुम्हें जोड़ने की साहस है।
क्या मैं जिससे बहुत दूर हूं,
क्या वो रास्ता जाना तुम्हारा प्रयास है।
तो चलो यह तंग इधर भी है उधर भी।




यह रचना राहुलदेव गौतम जी द्वारा लिखी गयी है .आपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है . आपकी "जलती हुई धूप" नामक काव्य -संग्रह प्रकाशित हो चुका  है .
संपर्क सूत्र - राहुल देव गौतम ,पोस्ट - भीमापर,जिला - गाज़ीपुर,उत्तर प्रदेश, पिन- २३३३०७
मोबाइल - ०८७९५०१०६५४

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