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मोहब्बत हो जाने का डर

पूर्णेश डडसेना
पूर्णेश डडसेना

उनके  मोहब्बत की नाकाम कोशिशों में 
रिश्तों के खो जाने का डर 
            नैन कहे कुछ और भी खवाबों में 
            पर प्यासे रह जाने का डर
नीम सरीके यादों को भूलाकर भी 
मन के तड़प जाने का डर 
            क्यो धीरे-धीरे मेरे  भीतर प्रवेश कर रहा है 
             ये खोखला  अंजाना सा डर 
उनकी नाकाम कोशिशों से भी 
मोहब्बत  हो  जाने का डर 
             भीतर से आज मुझे  शून्य करता 
              ये  कैसा अंजाना सा डर     
              
                                   



- श्रीमती पूर्णेश डडसेना
                                    शा• शिक्षिका  
                                   (रायपुर  छत्तीसगढ़ )

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