1
Advertisement

यह धार्मिक लोग !


रेलवे पुलिस कांस्टेबल गौरगोपाल महाकूड़ एक धार्मिक व्यक्ति हैं । सुबह से एक घंटा पूजापाठ न कर लें तो वह ड्यूटी के लिए नहीं निकलते । जिस स्टेशन में उसकी ड्टूटी है वहां सुबह-सुबह लोकल ट्रेन आती है । इसीलिए
धार्मिक
धार्मिक
वह भोर में ही उठकर पूजापाठ कर लेते हैं । उसी ट्रेन में चोरी की लकड़ी आती है । कौन यह सभी लकड़ी लाते हैं उन्हें गौर गोपाल भलीभांति पहचानते हैं । उनका घरद्बार, बच्चों की खबर भी वह रखते हैं । ऊपर से दबाव न हो तो वह उन्हें नहीं पकड़ते । गौरगोपाल बड़े ही दयालु हैं । दुसरे पुलिस कांस्टेबल की तरह उनपर वह जुल्म नहीं करते ।  लेकिन जमाना बहुत खराब है । वह जुल्म नहीं करते इसीलिए उन्हें पैसे भी कम मिलते हैं । गौरगोपाल उन्हें कहते हैं कि देखों इतने कम पैसे दोगे तो धर्म भी नहीं सहेगा । मुझे भी अपने आफिसर को देना पड़ता है ।

पुलिस इंसपेक्टर सुदाम सुबुद्धि भी बड़े ही धार्मिक हैं । उनके प्रयासों से ही भरतपुर थाने में एक त्रिनाथ मंदिर स्थापित हुआ है । वहां हर सोमवार भजन कीर्तन होता है । जिनके रिश्तेदार हिरासत में  हैं उन्हें सुदाम कहता है कि जो भी हो दान की पेटी में डाल दो । भगवान पर भरोसा रखो । दान-ध्यान करो । सब ठीक हो जाएगा ।

तभी गोपाल सुदाम बाबू के पास पहुंचा । पाकिट से छुट्टे निकाल कर मेज पर रख कर बोला, सर लीजिए आज की कमाई । इतने कम पैसे  देखकर सुदाम ने कहा, तू जो कर रहा है धर्म नहीं सहेगा ! लकड़ीवालों से जो लेकर आ रहा है अपनी जेब में डाल रहा है और कम पैसे लाकर मुझे दे रहा है । मैं कितना रखूं और ऊपर कितना दूं । तेरा तबादला करना पडे़गा ।
रिंटु रंगबाजी के लिए जाना जाता है । भरतपुर इलाके का दादा है । बाजार का सब्जीवाला, मछलीवाला, दुकानकार सभी उससे डरते हैं । उनसे नियमित हफ्ता वसूलता है । यहां तक कि कालेज में लड़कियां भी उसकी बाइक दूर से देखकर छिप जाती हैं । लड़कियों को परेशान करना उनकी हॉबी  है । वह दुर्गा मां का भक्त है । 

भरतपुर चौक पर मां दुर्गा की पूजा करने की उसने ठानी ।आजकल मुफ्त में पूजा नहीं होती । चंदे की जरूरत है । भरतपुर से गुजरने वाली हर बस और ट्रक से चंदा वसूलता है वह। यह बात भरतपुर थाना प्रभारी सुदाम बाबू तक पहुंची । उन्होंने रिंटु को बुलावा भेजा । पूछा, यह क्या ? तुम क्यों लोगों को परेशान कर रहे हो । जबरदस्ती चंदा वसूल रहे हो । रिंटु ने कहा सर आप तो धार्मिक हैं । इस कलियुग में धर्म की संस्थापना में कितनी परेशानियां आती है आप जानते हैं । चंदा न हो तो मां की पूजा कैसे होगी  ?

सुदाम बाबू ने कहा , रिंटु तुमने ठीक कहा । त्रिनाथ मंदिर की स्थापना के समय भी मुझे परेशानियों का सामना करना पड़ा । करो करो । तुम पूजा करो । लेकिन जबरन चंदा वसूलने की रिपोर्ट थाने में नहीं पहुंचनी चाहिए । 
रिंटू ने कहा, ठीक है । मैं कोशिश करूंगा कि थाने में रिपोर्ट न पहुंचे । जो रिपोर्ट देने आएगा उसकी माको...
-मा की केवल पूजा होती है रिंटु ।
-जी सर ।
-लेकिन हर लड़की मां नहीं । अगर हर लड़की मां हो गई तो संसार कैसे चलेगा ? हम क्या ब्रह्मचारी हो जाएं । हा..हा..हा
-हा..हा...हा


- मृणाल चटर्जी
अनुवाद - इतिश्री सिंह राठौर



मृणाल चटर्जी ओडिशा के जानेमाने लेखक और प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं । मृणाल ने अपने स्तम्भ 'जगते थिबा जेते दिन' ( संसार में रहने तक) से ओड़िया व्यंग्य लेखन क्षेत्र को एक मोड़ दिया । इनका एक नाटक संकलन प्रकाशित होने वाला है। 

एक टिप्पणी भेजें

  1. अच्छा व्यंग्य है पर इतनी सच्चाई मन को दुख देती है

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top