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सोशल मीडिया में बढ़ता हिन्दी का प्रयोग


सोशल मीडिया में हिन्दी का प्रयोग वर्तमान सदी इंटरनेट और वेब मीडिया वाली सोशल मीडिया की सदी बन गई है। एक समय था जब मीडिया के केवल दो प्रकार प्रिंट मीडिया और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया प्रचलित थे। धीरे धीरे जब इंटरनेट का प्रादुर्भाव हुआ, तो उसने अपने तरीके से समाज को प्रभावित करना शुरु किया। हम कह सकते हैं कि रेडियो और टेलीविजन के बाद इंटरनेट के बढ़ते प्रचलन से आई सूचना क्रांति ने सोशल मीडिया को जन्म दिया है। कभी मीडिया जन सूमह तक सूचना, शिक्षा और मनोरंजन पहुंचाने का सरल और सक्षम साधन हुआ करते थे। वहीं आज के 3जी और 4जी के दौर में यही काम अब सोशल मीडिया करने लगा है। यह हर उम्र के व्यक्ति के दिन प्रतिदिन के जीवन से जुड़ गया है।

सोशल मीडियासरल भाषा में समझा जाए तो सोशल मीडिया एक तरह से दुनिया के विभिन्न कोनों में बैठे उन लोगों से संवाद करने का सशक्त माध्यम है जिनके पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है। यह पारस्परिक संबंध के लिए इंटरनेट या अन्य माध्यमों द्वारा निर्मित आभासी समूहों को संदर्भित करता है। सोशल मीडिया ने विश्व को जैसे सीमित कर दिया है, पल भर में संदेशों से लेकर फोटों आदि द्वारा लोग दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर पर अपनी बातों को अपनों तक पहुंचा पा रहे हैं। इससे लोग न सिर्फ अपनी बातों को दुनिया के सामने रख पाते हैं, बल्कि वे दूसरी की बातों सहित दुनिया की तमाम घटनाओं से अवगत भी होते हैं।

विश्व में लगभग 200 सोशल नेटवर्किंग साइटें हैं जिनमें फेसबुक, ट्विटर, आरकुट, माई स्पेस, लिंक्डइन, फ्लिकर, इंस्टाग्राम सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। इन सभी साइटों का उपयोग विश्व स्तर पर सामाजिक संबंधों को बनाने के लिए मोबाइल और वेब आधारित प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के आधार पर किया जा रहा है। सोशल मीडिया के प्रयोक्ताओं पर किए गए अनेक सर्वेक्षणों से एक बात सामने आती है कि औसत तौर पर दुनियाभर में फेसबुक को लगभग 1 अरब 28 करोड़,  इंस्टाग्राम को 15 करोड़, लिंक्डइन को 20 करोड़, माई स्पेस को 3 करोड़ और ट्वीटर को 9 करोड़ लोग प्रयोग में ला रहे हैं। इस तरह सोशल मीडिया के क्षेत्र में फेसबुक सबसे अग्रणी है।

प्रायः इन सभी लोकप्रिय सोशल मीडिया साइटों पर उपयोग की जाने वाली विभिन्न भाषाओं में हिन्दी ने भी अपना
डॉ. शुभ्रता मिश्रा
डॉ. शुभ्रता मिश्रा
वर्चस्व बना लिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार केवल भारत मे फेसबुक और ट्विटर पर सक्रिय भारतीय सदस्यों की संख्या क्रमश: 100 मिलियन और 33 मिलियन के पार है। स्मार्ट फोनों पर चलने वाली वाट्सऐप मैसेंजर तत्क्षण मेसेजिंग सेवा में तो हिन्दी ने धूम मचा रखी है। एक सर्वेक्षण के अनुसार वाट्सऐप के सबसे अधिक प्रयोक्ता भारत में हैं। हांलाकि आज भी देश में 90 करोड़ लोग इंटरनेट की पहुंच से दूर हैं, जबकि गूगल का अनुमान है कि सन् 2020 तक 25 करोड़ भारतीय ऑनलाइन हो जाएंगे और इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या 65 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद भी मौजूदा समय में भारत में लगभग 40 करोड़ इंटरनेट प्रयोक्ताओं में से 33 करोड़ लोग मात्र स्मार्टफोन के द्वारा सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। भारत पिछले 15 महीनों में ब्रॉडबैंड राष्ट्र बन गया है। दुनिया भर के 1.5 बिलियन यूट्यूब यूज़र में से 225 मिलियन यूज़र भारत के मोबाइल यूज़र हैं। और गूगल प्ले में भारत, हर महीने एक बिलियन ऐप डाउनलोड के साथ नंबर 1 पर है।

हिन्दी के परिपेक्ष्य में देखें तो एक सुखद तथ्य यह सामने आता है कि भारत में 28 प्रतिशत सर्च क्वेरी यानि पूछताछ वॉयस के माध्यम से होती है। हिंदी वॉयस सर्च क्वेरी में प्रतिवर्ष 400 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो रही है। यूनिकोड जैसे फॉन्ट के आ जाने से इंटरनेट पर हिंदी को उसके सही देवनागरी स्वरुप में लिखना-पढाना आसान हो गया है। यूनिकोड से तात्पर्य सभी भाषाई लिपिचिह्नों की आवश्यकता की पूर्ति करने में सक्षम 'एकसमान मानकीकृत कोड' से है। विश्व की सभी लिपियों से सभी संकेतों के लिए एक अलग कोड बिन्दु प्रदान किए गए है। हिन्दी के अक्षरों और व्यंजनों के लिए भी यूनीकोड निर्धारित हैं। देवनागरी यूनिकोड की परास 0900 से 097एफ तक है। भारत में यूनीकोड के आगमन से  सोशल मीडिया पर हिन्दी बढ़ावा को काफी बढ़ावा मिला है। 

सोशल मीडिया पर हिन्दी के प्रवेश से पहले जुलाई, 2003 में हिन्दी विकिपीडिया का आरम्भ हुआ था। 2003 में ही हिन्दी (भारतीय बहुभाषायी) लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम मिलन आया और हिन्दी वर्तनी जाँच सुविधा युक्त माइक्रोसॉफ्ट का ऑफिस सुइट हिन्दी में जारी किया गया। इसी वर्ष ओपनऑफिस का हिन्दी इंटरफेस युक्त संस्करण 1.1 भी आया। इस तरह इंटरनेट पर हिन्दी की उपलब्धता से हिन्दी ब्लॉगों का पदार्पण हुआ और साथ ही जीमेल के जरिये हिन्दी में ईमेल की सुविधा भी आ गई। मार्च 2007 में गूगल समाचार सेवा हिन्दी में शुरु होने के बाद से हिन्दी के अनेक सॉफ्टवेयर उपलब्ध हो जाने और हिन्दी समर्थन वाले वर्चुअल कीबोर्ड के आने से आम लोगों के लिए हिन्दी का प्रयोग बहुत आसान हो गया।

सोशल मीडिया पर हिन्दी सरलीकरण के लिए और भी बहुत से काम हुए, उनमें गूगल मानचित्र हिन्दी में देखने, बोलकर हिन्दी टाइप करने, हिन्दी वॉयस-सर्च (बोलकर खोजने की सुविधा), इंडियन लैंग्वेज इंटरनेट अलायंस आदि की सुविधाएं मिलना प्रमुख हैं। दिसम्बर 2014 को स्‍पाइस ने पहला देशी (हिन्दी) स्‍मार्टफोन 'ड्रीम उनो एच' लॉन्‍च किया था। तब से हिन्दी का प्रयोग सोशल मीडिया पर और अधिक बढ़ गया। सोशल मीडिया पर हिंदी के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए गूगल जैसी कंपनियां भी हिंदी भाषियों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। ट्विटर के अनुसार वर्ष 2011 में यूज़र्स की संख्या 10 करोड़ पहुंच जाने पर कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर हिंदी इनपुट की व्यवस्था की थी। इंटरनेट पर हिंदी की लोकप्रियता बढ़ाने में ब्लॉगों का अहम योगदान रहा है। वर्ष 2003 में जहां हिन्दी भाषा का पहला ब्लॉग आलोक कुमार नाम के एक तकनीकी विशेषज्ञ ने '9-2-11Ó नाम से बनाया। आज इनकी संख्या एक लाख से ऊपर निकल चुकी है। इन ब्लॉगों में से 15-20 हजार को सक्रिय और 5 से 6 हजार को अतिसक्रिय की श्रेणी में रखा जा सकता है। 

इस समय भारत में सोशल मीडिया में हिंदी सबसे लोकप्रिय भाषा के रूप में स्थापित होती जा रही है। स्टोरीनोमिक्स नामक संस्था ने दस भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल और तेलुगु के 135 अग्रणी भारतीय मीडिया द्वारा साझा किए गए 8,70,000 संदेशों का अध्ययन करने पर पाया है कि अंग्रेजी की तुलना में सोशल मीडिया पर हिंदी संदेश बहुत अधिक साझा किए जा रहे हैं। यह भी पाया गया है कि वर्ष 2016 में फेसबुक, ट्विटर और लिंक्डइन पर एक संदेश औसतन 2,587 बार साझा किया गया था। इनमें से 5,000 संदेश ऐसे थे जिन्हें औसतन 71,494 बार साझा किया गया था।

भारतीय सोशल मीडिया के हिन्दी ऐप शेयरचैट ने भी हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। शेयर चैट एक फ्री एंड्रॉयड ऐप है और फिलहाल यह आईओएस प्लैटफॉर्म पर मोजूद नहीं है। 2015 में अस्तित्व में आए इस शेयरचैट को आईआईटी कानपुर के तीन युवाओं अंकुश सचदेवा, भानु सिंह और फरीद ने बनाया था। यह ऐप शेयरचैट पूरी तरह से देशी है। इस ऐप के माध्यम से हिंदी, तमिल, तेलुगू, पंजाबी, भोजपुरी और छत्तीसगढ़ी सहित 10 भाषाओं में बातें की जाती हैं। खास बात यह है कि अंग्रेजी भाषा इसमें शामिल नहीं है। भारत में अंग्रेजी बोलने वालों का प्रतिशत मात्र 10 प्रतिशत है। ऐसे में शेष 90 प्रतिशत अंग्रेजी नहीं जानने वाली आबादी के लिए शेयरचैट एक उमदा सोशल मीडिया साबित हो रहा है। 

जिस तरह से आज समाज के हर वर्ग ने सोशल मीडिया को अपनी स्वीकृति दी है उससे पूरी संभावना है कि आने वाले समय में हिन्दी की स्वीकार्यता और उपयोगिता बड़े पैमाने पर और बढ़ेगी। बदलती परिस्थितियों से एक बात सुनिश्चित है कि भविष्य मे हिन्दी सोशल मीडिया पर व्यापक स्तर पर अपना साम्राज्य स्थापित करेगी।



- डॉ. शुभ्रता मिश्रा
वास्को-द-गामा, गोवा

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