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सबसे बड़ा मनहूस
Sabse Bada Manhoos


सबसे बड़ा मनहूस Sabse Bada Manhoos - एक दिन नगर कोतवाल एक व्यक्ति को पकड़कर दरबार में ले आया .बादशाह के सामने उसका अपराध सुनाते हुए कहा - 

"हुजुर आला , यह आदमी बड़ा मनहूस है - इसकी वजह से नगर के लोगों को बड़ी तकलीफें होती है . सैकड़ों लोगों की शीकायतें आ चुकी हैं . एक की शिकायत है कि वह अपनी बेटी की सगाई ले कर जा रहा था ,सुबह -
अकबर बीरबल
अकबर बीरबल
सुबह इसकी सूरत देख ली सगाई टूट गयी .दूसरे की शिकायत है कि वह शिकार को जा रहा था ,शिकार पर निकलते ही इसकी शक्ल देख ली ,शिकार तो दूर रहा ,धोड़े से गिरकर लंगड़ा हो गया .तीसरे की शिकायत है ,उसने इसकी शक्ल देख ली तो उसका लड़का मर गया .चौथे की भेड़ बकरियाँ मर गयी ,पाँचवे के घर में आग लग गयी . "
नगर कोतवाल अन्य लोगों की शिकायतें रखता ,इससे पहले ही बादशाह ने हाथ उठाकर कहा - "बस - बस ,अब इस व्यक्ति को भी कुछ कहने का मौका दिया जाए . " फिर घूमकर बादशाह ने लाये गए व्यक्ति से कहा - "बोलो ,तुम्हे अपनी सफाई में क्या कहना है - ?
"बंदा परवर लोग ऐसा कहते हैं ,इसीलिए मैं अपनी सफाई में क्या कहूँ ! "
दरबारियों में से किसी ने कहा - "ऐसे मनहूस व्यक्ति को देश निकाला दे दिया जाए ,वर्ना इसकी मनहूसियत का साया पड़ने से जनता को आये दिन तकलीफें भोगनी पड़ेगी . 
बीरबल खामोश बैठे सही अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे .बादशाह भी ऐसी अन्धविश्वास भरी बात स्वीकार करने को तैयार करने को तैयार नहीं थे ,मगर शिकायतें पर ध्यान भी देना था ,सो उन्होंने कहा - ठीक है ,मैं स्वयं आजमाऊंगा ,उसके बाद कोई फैलसा करूँगा . 
यह कहकर मनहूस व्यक्ति को उस रात बादशाह ने महल के ही एक भाग में ठहरा लिया . 
अगले दिन सुबह उठते ही सबसे पहले उसका मुँह देखने गए - मनहूस को जगाकर उसका मुँह देखा .इत्तफाक की बात उस दिन ईरान और ईराक के कुछ मेहमान बादशाह के पास राज - काज सम्बंधित मशवरे के लिए आ गए .उनके साथ बादशाह कुछ ऐसे उलझे कि सुबह से शाम हो गयी ,ना तो अन्न नसीब हुआ न ही जल . 
"शाम को थके - मांदे बादशाह आराम करने को लेटे तो उन्हें यह बात ध्यान आई कि आज तो अन्न - जल नसीब नहीं हुआ .किसी चापलूस दरबारी ने ध्यान दिलाया .यह सब उस मनहूस की शक्ल देखने का नतीजा है बादशाह सलामत ."
"अब तो बादशाह को भी यकीन आ गया .उन्होंने फ़ौरन दरबार लगवाया - मनहूस को दरबार में हाज़िर करने का हुक्म दिया .सजा सुनाई - " कल इस मनहूस के बारे में सजा तजवीज़ की गयी थी कि इसे देश निकाला दे दिया जाए , मगर मेरे विचार से यह सजा कम है और यह जहाँ भी जाएगा अन्य लोगों को कष्ट उठाना पड़ेगा जैसा कि मेरे साथ हुआ आज सुबह - सुबह इसका मुँह देखा ,सारा दिन बीत गया अन्न ,जल नसीब न हुआ .ऐसे मनहूस व्यक्ति के लिए बस एक ही चारा है ,इसे फाँसी पर चढ़ा दिया जाए . 

फाँसी की सजा सुनते ही मनहूस के चेहरे पर कालिमा दौड़ गयी - बीरबल ने अपना स्थान छोड़ा. 

"तुम्हे कुछ कहना है बीरबल - ? "बादशाह ने पूछा . 

"अगर आपकी ओर से कुछ कहने का हुक्म हो जहाँपनाह तो बंदा कुछ कहने की इजाजत चाहता हैं ."

"अवश्य - अवश्य .."

"क्या मुझे मनहूस से कुछ पूछने की इजाजत है ." बीरबल आगे बढ़ते हुए बोले. 

"क्यों नहीं ..क्यों नहीं ...?

"भाई मनहूस - एक बात बताओगे - डरो मत ,तुम्हे सजा नहीं मिलेगी - बस इतना बता जाओ कि आज सुबह - सुबह तुमने किसका मुँह देखा था ? जिसकी मनहूसी के साए में तुम्हे सजा सुनाई गयी ."

"हुजुर - बादशाह सलामत ने ही आकर मुझे जगाया था ,इनका ही मैंने मुँह देखा था . "

"अब आप स्वयं इन्साफ करे जिल्लेइलाही . ! आपने इसका मुँह देखा तो अन्न - जल न मिला ,इसने आपका मुँह देखा तो इसे फाँसी की सजा सुनने को मिली .यहाँ गौर तलब बात यह है कि सबसे बड़ा मनहूस कौन हुआ .बादशाह का चेहरा मुरझा गया . "


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