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प्यार का प्रतीक : रक्षाबंधन


सावन का महीना हम स्त्रियों के लिए अत्यंत हर्ष और उल्लास से भरा हुआ होता है | वर्षा की सोंधी महक से शुरू हुआ ये आनंदमयी सफ़र , शिव जी की पूजा-आराधना , तीज , नागपंचमी  आदि त्योहारों से होता हुआ पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले त्योहार रक्षा-बंधन पर समाप्त होता है | रक्षा-बंधन जिसे हम लोग श्रावणी या राखी भी कहते हैं |  रक्षा-बंधन भाई-बहन का त्योहार है | बहनें अपने भाईयों को राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देता है |

रक्षाबंधन
रक्षाबंधन
हमारे पुराणों में ऐसी कई कथाएँ मिलतीं हैं जहाँ इस रक्षा सूत्र ने  भाई और बहन दोनों की रक्षा की है | जैसे- लक्ष्मी जी ने बालि को राखी बांधी और उपहारस्वरूप अपने पति विष्णु जी को वापिस क्षीर सागर ले आईं | ऐसे ही जब युद्ध में इंद्र देव दानवों से पराजित होने लगे तो उनकी बहन इंद्राणी ने रक्षा-सूत्र बाँध कर उनकी प्राण रक्षा की | इसी संदर्भ में द्रौपदी की कथा का उल्लेख होना भी अति आवश्यक है – जब श्रीकृष्ण की ऊँगली से खून बह रहा था तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा उनकी ऊँगली में बाँध दिया था | उसे श्रीकृष्ण ने राखी की संज्ञा देते हुए उनकी रक्षा का वचन दिया तथा चीर हरण के समय उनकी लाज बचाई |

वहीं इतिहास में आज से करीब छह हज़ार साल पहले चित्तौड़ की रानी कर्णावती का विशेष उल्लेख है जब उन्होंने अपने राज्य की सुरक्षा के लिए हुमायूँ को राखी भेजी थी जिसका मान रखते हुए हुमायूँ ने गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से उनकी रक्षा की |

रक्षा-बंधन का त्योहार सिर्फ भाई-बहन का त्योहार ही नहीं है बल्कि ये त्योहार है रक्षा का,वचन का |इस दिन घरों में विभिन्न प्रकार के पूजा-पाठ का आयोजन करने के साथ-साथ  अपने घर-परिवार की सुरक्षा हेतु हवन भी कराते हैं | घर की पहली राखी ईश्वर के चरणों में रख उनसे अपनी कृपादृष्टि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं |

कहने के लिए यह सिर्फ एक धागा है पर बहनें अपने भाईयों की कलाईयाँ सजाने के लिए चुन-चुन कर राखी खरीदतीं हैं | आजकल तो कलावों से बनी राखी से लेकर सोने-चाँदी तक की बनी राखियाँ बाज़ार में आसानी से उपलब्ध हैं | बहनों के लिए उपहार खरीदने के लिए भाई भी पीछे नहीं रहते | तभी तो आजकल विभिन्न कम्पनियाँ कपड़े , गहने , चोकलेट , मिठाईयों तक पर खरीदारी के अलग-अलग लुभावने अवसर देतीं हैं |

दूर रहने वाली बहनें पहले राखियाँ लिफ़ाफ़े में भेजा करती थीं |  तो राखी के अवसर पर डाक विभाग का काम बढ़ना स्वाभाविक से बात थी | दूर-दूर के गांवों में  भी , जहाँ साल भर तक कोई डाक नहीं आती थी , राखी के समय वहाँ की भी चिट्ठियां आने लग जातीं थी | इसीलिए दुकानों में हल्की राखियाँ भी मिलतीं थी जिससे कि उन्हें लिफ़ाफ़े में भेजने में परेशानी न हो | फिर ये काम कुरियर कंपनियों ने बाँट लिया | और अब इंटरनेट की दुनिया में ये काम ऑनलाइन भी होने लगा है | देश-विदेश में बसे भाई-बहनों के लिए तो यह किसी वरदान से कम नहीं है | वेबसाइट पर राखी पसंद करो, आर्डर दो और कम से कम समय में राखी आपके भाई के पास | इतना ही नहीं बल्कि ये कंपनियां आपके भाईयों के लिए मिठाई और उपहार भी आसानी से पहुँचा देतीं हैं |

बहनें अपनी घर-गृहस्थी में या नौकरी में चाहे कितनी भी व्यस्त क्यों न हों ,पर इस दिन वे सब कुछ छोड़कर राखी बाँधने अपने मायके ज़रूर पहुँचेंगी | नवीन परिधानों में, हाथों में मेंहदी लगाए वे अपने भाईयों के माथे पर तिलक लगाकर राखी बांधतीं हैं, आरती उतारतीं हैं और मुँह मीठा कराती हैं | एक बार फिर भाई-बहनों का बचपन उनकी आँखों में, उनके मन-मस्तिष्क में सजीव हो उठता है | माता-पिता का चेहरा भी खुशी से दमकने लगता है |
  
स्त्रियों के लिए राखी का त्योहार कुछ अलग ही विशेषताओं से भरा हुआ होता है | कहीं-कहीं तो ये त्योहार कुछ अलग तरह से मनाया जाता है | भाई के साथ-साथ भाभी को भी राखी बाँधी जाती है जिससे ननद-भाभी का रिश्ता भी प्रगाढ़ होता है | इसके अलावा भी कुछ खास है इसमें, एक ओर तो स्त्रियाँ  अपने मायके जाती है वहीं दूसरी ओर उन्हें अपनी पुरानी सखियों से मुलाकात का भी सुअवसर मिलता है | उनका रिश्ता बातों-मुलाकातों के जल से सिंचकर एक बार फिर हरा-भरा हो जाता है |

भाई – बहन का रिश्ता हर सोच , हर  भेदभाव , हर स्वार्थ से परे होता है | यह तो इंद्रधनुष  की तरह है | जिसमें कई रंग भरे हुए हैं | जन्म से लेकर बुढ़ापे तक इस रिश्ते की यात्रा अनवरत चलती रहती है |  कितने पड़ावों को पार करती है और हर पड़ाव अलग ही रंग में रंगा हुआ होता है | बचपन में यह रिश्ता  शैतानियों , चुहलबाजियों ,खेल-कूद और शरारती के शोख रंग से भरा होता है | तो शैशवावस्था में भाई या बहन दोस्त बन जाते हैं , एक-दूसरे से अपने विद्यालय की , सहपाठियों की , पढाई की अनगिनत बातें साझा करते हैं | युवावस्था में आते-आते भाई-बहन एक दूसरे का ख्याल रखते हैं , मानसिक , नैतिक , सामाजिक , पारिवारिक हर रूप में |  कहीं भाई के लिए बहन, कहीं बहन के लिए भाई ढाल बनकर खड़े नजर आते हैं , फिर चाहे विषय चुनना हो या कॉलेज | और जिंदगी का सबसे बड़ा पड़ाव – विवाह | बहन के विवाह बात चलते ही भाई कब ज़िम्मेदार और समझदार हो जाता है ,किसी को पता ही नहीं चलता | भाई से ज़्यादा पिता बन जाता है | बहन को क्या चाहिए , कहीं कोई तकलीफ़ न हो , हर चीज़ का ध्यान खुद ही रखता है |  वहीं बहन भी पीछे नहीं रहती , भाई का हर तरह से ध्यान रखती है खाने से लेकर कपड़ों तक | स्त्रियों का मायका सिर्फ माता-पिता तक ही सीमित नहीं होता | ‘मेरा भाई’ , ‘मेरी बहन’ ये शब्द बरबस ही आँखों में प्यार और होठों पर मुस्कराहट ला देते हैं |      

प्राचीनकाल में जहाँ स्त्रियाँ राखी बाँध कर भाईयों से अपनी रक्षा का वचन लेतीं थीं वहीं आजकल की नारी राखी बांधते समय अपने भाई की रक्षा करने का वचन भी देती है और समय आने पर साबित भी कर देती है कि वह संकट के समय अपने भाई के सामने रक्षा कवच बन कर खड़ी हो सकती है |

रक्षा-बंधन रक्षा का वचन है जो हर भाई अपनी बहन को और हर बहन अपने भाई को देती है | 



लेखिका-
इलाश्री जायसवाल
ईमेल - ila_shri@yahoo.com

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