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जितनी लम्बी चादर हो उतने ही पैर फैलाने चाहिए
jitni chadar ho utna hi pair phailana chahiye


एक बड़ा अधिकारी था .उसकी तनख्वाह अच्छी थी .वह अपना पैसा जिस सामान ख़रीदे या पचास पैसे की कोई
खर्च
खर्च
चीज़. फिर महीने के अंत में वह खर्च का पूरा हिसाब जोड़ता . अगर अधिक खर्च हो गया तो कैसे हुआ या कुछ कम खर्च आया तो वह सोचता कि कैसे बचत हुई .उसके परिवार में पैसे की कोई कमी नहीं थी .फिर भी वह फिजूलखर्ची नहीं करता था .उसे कभी किसी चीज़ की कमी नहीं हुई. कहावत है - जितनी चादर लम्बी हो ,उतना ही पैर फैलाना चाहिए .

जो लोग अपनी सीमा के रहते हैं .उन्हें कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता है .कुछ ऐसे भी अधिकारी होते हैं ,जो रिश्वत लेते हैं खर्च भी मनमाना करते हैं .ऐसे लोग हमेशा दुखी ही रहते हैं .उन्हें हमेशा डर बना रहता है कि वे रिश्वत लेते हुए पकड़े न जाए .पैसा भी कभी - कभी दुःख का कारण बन जाता है .गलत ढंग से पैसा कमाने वाले दिखावे के लिए दान भी बहुत करते हैं .और दान किसी और को किया जाता है .इससे दोनों पलड़े बराबर नहीं होते हैं .मनुष्य की जितनी आमदनी हो ,उसमें कुछ बचत करके ही खर्च करना चाहिए .अगर कोई अपनी आमदनी से दोगुना खर्च करता है तो वह बेईमानी करने के लिए सोचता है .दुनिया के पास क्या क्या है ,वो सबको नहीं मिल सकता है .अच्छा है आपके पास जो है ,उसी में खुश रहें और उसे संभाल कर रखें .इससे परिवार भी खुश रहेगा . 


कहानी से शिक्षा - 

  • आज का काम कल पर कभी मत टालो. 
  • वही उन्नति कर सकता है ,जो स्वयं को उपदेश होता है . 
  • जितनी चादर लम्बी हो ,उतना ही पैर फैलाना चाहिए .

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