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चोरी नहीं करनी चाहिए
chori nahi karni chahiye 


एक खरगोश ने बचपन में लालचवश एक बार चोरी की .फिर दो बार चोरी की .इसके बाद उसकी आदत पड़ गयी और वह पक्का चोर बन गया .कहीं भी जाता कोई न कोई सामान जरुर चुरा लेता .धीरे - धीरे उसे चोरी करते कई वर्ष बीत गए लेकिन वह एक बार भी नहीं पकड़ा गया जिससे उसका मनोबल बढ़ता गया .

एक दिन वह कहीं किसी काम से जा रहा था .रास्ते में उसे एक गन्ने का खेत दिखाई दिया .उसने सोचा ,क्यों न एक तोड़कर चूसते हुए सफ़र करूँ . 

गन्ने का खेत
गन्ने का खेत
फिर उसने आव न देखा ताव फ़ौरन चुपके से गन्ने के खेत में घुस गया और गन्ने तोड़ने लगा .ताड - ताड की आवाज हुई .किसान को मालूम हो गया कि कोई उसका गन्ना तोड़ रहा है .वह भी चुपके से खेत की तरफ बढ़ा . 

किसान ने चोरी करते हुए खरगोश को पकड़ लिया और कहा ," अब मैं तुम्हे ले जाकर बाज़ार में बेच दूंगा .और तुम सदा के लिए पिंजड़े में बंद हो जाओगे ." अब तो खरगोश बहुत घबराया .उसने किसान से कहा ," मुझे छोड़ दीजिये ."

इस पर किसान बोला ,"घबराओ नहीं ,चोरी करने वाले की यह दशा होती है .मैं तो बेचे दे रहा हूँ ,दूसरा कोई होता तो तुम्हे मार ही डालता .

खरगोश समझ गया कि अब किसान मानेगा नहीं और उसे बेच ही डालेगा .उसकी आँखों से आँसू बहने लगे .अपनी करनी पर वह पश्चाताप करने लगा . 

खरगोश को रोते देख किसान के अन्दर दया आ गयी .उसने उससे कहा ," यदि तुम कसम खाकर कहो कि मैं चोरी नहीं करूँगा तो मैंने तुम्हे छोड़ दूंगा .इस पर खरगोश ने कसम खाकर कहा ," अब मैं कभी भी चोरी नहीं करूँगा ."
उसके इतना कहने पर किसान ने उसे छोड़ दिया और वह अपने आँसुओं को पोंछते हुए मन में ईमानदारी से रहने की बात सोचते हुए अपनी राह पर चल दिया . 


कहानी से शिक्षा - 

  • कभी चोरी नहीं करनी चाहिए . 
  • ईमानदारी से जीवन व्यतीत करना चाहिए . 

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