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आत्महत्या नहीं करनी चाहिए
Aatmhatya Nahi Karni Chahiye


बहुत समय पहले की बात है .रामपुर गाँव में एक गरीब मजदूर मोहन रहता था .उसके घर में उसकी पत्नी और दो बच्चे थे .कई दिनों से उसे कुछ खाने के लिए कुछ नहीं मिला था इसीलिए परिवार में सब भूखे थे . 

गरीब आदमी
गरीब आदमी 
असहनीय गरीबी से तंग आकर मोहन ने एक दिन निर्णय किया कि आज अपनी गरीबी से मुक्ति पाने के लिए खुद जहरीली जड़ी खाउंगा और परिवार को भी खिलाऊंगा. 

मोहन जहरीली जड़ी खोजने के लिए निकल पड़ा. जाते - जाते काफी दूर चला गया लेकिन उसे जड़ी नहीं मिली .चलते - चलते काफी दूर चला गया लेकिन उसे जड़ी नहीं मिली .चलते - चलते वह बहुत थक गया और एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगा . 

तभी मोहन ने देखा कि एक महात्मा जी अपने शिष्यों को उपदेश दे रहे हैं . वे कह रहे थे - " किसी को भी गरीबी से तंग आकर ,क्रोध में आकर अथवा किसी भी बात से दुखी होकर आत्म हत्या नहीं करनी चाहिए . 

"ऐसा करने वाला भूत - प्रेत ,पिशाच बन जाता है .आत्म हत्या करने वाला महापापी होता है . "

"आत्म हत्या करने वाला सोचता है कि ऐसा करने पर उसे दुखो से मुक्ति मिल जायेगी .उसका यह सोचना गलत है .उसे अपने कर्मों का भोग किसी न किसी योनी में करना ही पड़ता है .वह आत्म हत्या करके एक नया पाप कर्म करता है जिससे वह भूत प्रेत बन जाता है और हजारों वर्षों तक दुःख भोगता है . 

महात्मा जी का उपदेश सुनकर मोहन डर गया .उसे ज्ञान को गया .जहरीली जड़ी खोजने का विचार  छोड़कर अपने घर चला गया और मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का भरण - पोषण करने लगा .धीरे - धीरे उसकी गरीबी दूर हो गयी . इसी प्रकार मोहन का परिवार खुशहाल हो गया . 


कहानी से शिक्षा - 
  • मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का भरण - पोषण करना चाहिए . 
  • किसी को भी गरीबी से तंग आकर ,क्रोध में आकर अथवा किसी भी बात से दुखी होकर आत्म हत्या नहीं करनी चाहिए . 

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