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सिल्वर वेडिंग मनोहर श्याम जोशी 
Silver Wedding Manohar Shyam Joshi


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कहानी के प्रारंभ में यशोधर बाबू दफ्तर की घड़ी में साढ़े पाँच के अनुसार काम कर रहे हैं .वे अपनी घड़ी रोजाना सुबह - शाम रेडियो समाचारों से मिलाते हैं ,इसीलिए वे दफ्तर की घड़ी को सुस्त मानते हैं .वापसी के समय वे किशनदा की उस परंपरा का पालन करते हैं जिसमें जूनियरों से हल्का फुल्का मज़ाक किया जाता है .असिस्टेंट ग्रेड में आये एक नए लड़के चड्ढा ने यशोधर बाबू से थोड़ी बदतमीजीपूर्ण व्यवहार करते हुए पन्त जी के चूहेदानी का हाल पूछा ,तो भी यशोधर बाबू ने उसकी धृष्टता को अनदेखा कर दिया .

सिल्वर वेडिंग
सिल्वर वेडिंग
यशोधर बाबू के जीवन में किशनदा की छाप है . वे उन्हें गुरु मानते हैं .किशनदा कुँवारे थे और पहाड़ी लड़कों को आश्रय देते थे .यशोधर जब दिल्ली आये तो उनकी उम्र सरकारी नौकरी के लिए कम थी .तब किशनदा ने उन्हें मेस का रशोइया बना दिया और फिर उन्हें अपने ही दफ्तर में सरकारी नौकरी दिलवाई और जीवन के हर कठिन समय में वे सदैव उनका साथ देते रहे .

यशोधर बाबू ने रोज बिडला मंदिर जाने और उसके उद्यान में बैठकर प्रवचन सुनने या स्वयं ही प्रभु का ध्यान लगाने की नयी रीती बनायीं है .पिछले कई बर्षों से उनकी पत्नी से व बच्चों से हर छोटी - बड़ी बात पर मतभेद हो जाया करता है .उन्हें जब भी कोई बात बुरी लगती तो वे समहाउ इम्प्रोपेर कहकर चुप हो जाते थे .

यशोधर बाबू का बड़ा लड़का एक प्रमुख विज्ञापन कंपनी में १५०० रुपये की नौकरी कर रहा है .उनका दूसरा बेटा आई .ए .एस .की नौकरी कर रहा है .तीसरा बेटा स्चोल्लेर्शिप लेकर अमेरिका चला गया है .उनकी एकमात्र बेटी शादी न करके उच्च शिक्षा के लिए डोक्टारी पढने अमेरिका जाना चाहती है .दुनिया दारी के मामले में इनकी पत्नी और बच्चे ज्यादा सुलझे हुए लगते हैं .वहीँ यशोधर बाबू  पुराने विचारों वाले व्यक्ति हैं ,वे किशनदा के सिद्धांतों पर चलना चाहते हैं .वे किशनदा की तरह रोज मंदिर जाने ,संध्या पूजा करने और गीता प्रेस गोरखपुर की किताबें पढने का यत्न करते हैं .शाम को जब वे सब्जी लेकर घर पहुँचे तो देखा कि घर के बाहर कार खड़ी है .कुछ स्चूटर ,मोटर सिसिल थी तथा कुछ लोग विदा ले रहे थे .उनकी लड़की जींस और टॉप  पहने  हुई है .पत्नी ने होंठों पर लाली लगाये हुए हैं . यशोधर बाबू की शादी की सालगिरह पार्टी बहुत ही आधुनिक तरीके से मनाई जा रही थी ,जिसमें वह पार्टी में केक  काटा गया .बड़े बेटे भूषण ने उनी द्रेशिंग गाउन दिया और कहा कि सुबह दूध लाने के समय आप फटा हुआ फूलओवर पहनकर जाती है .उन्हें यह बुरा लगा कि भूषण उन्हें ही सुबह दूध लाने की बात कहता है ,वह स्वयं नहीं लाना चाहता है .गाउन पहनकर उन्हें ऐसा लगा कि उनके अंगों में किशन दा उतर आये हैं ,जिनकी मौत जो हुआ होगा से हुई है .


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प्र.1. यशोधर बाबू की पत्नी समय के साथ ढल सकने में सफल होती है लेकिन यशोधर बाबू असफल रहते हैं। ऐसा क्यों?

उ.१. यशोधर बाबू की पत्नी समय के अनुसार बदल पाने में सफल हो पाती है जबकि यशोधर सफल नहीं हो पाते हैं .यशोधर का जीवन किशनदा जैसे कुँवारे और पुरातनपंथी लोगों के बीच में बीता .वे जीवन भर किशन दा के सिद्धांत पर चलते रहे .वे नयी पीढ़ी के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाते .जबकि उनकी पत्नी अपने बच्चों के साथ आधुनिकता को अपना लेती है .वह हमेशा बच्चों को पक्ष लेती है .

प्र.2. पाठ में ‘जो हुआ होगा‘ वाक्य की आप कितनी अर्थ छवियाँ खोज सकते / सकती हैं?

उ.२. जो हुआ होगा शब्द पाठ में ध्वनित होता रहता है .यह शब्द अनिर्णय की स्थिति में लाता है .यशोधर बाबू के ऊपर किशनदा का प्रभाव है .किशनदा की मृत्यु के सम्बन्ध में पूछने पर जबाब मिलता है  - जो हुआ होगा .रीतिरेमेंट के बाद किशनदा गाँव चले गए .साल भर बाद उनकी मृत्यु हो गयी .उनको कोई बीमारी भी नहीं थी .वे अपने बुढ़ापे में उपेक्षा का शिकार हुए .उनकी मृत्यु का कारण कोई नहीं जानता .जो हुआ होगा से उनकी मृत्यु हुई है .

प्र.3. ‘समहाउ इंप्रापर‘ वाक्यांश का प्रयोग यशोधर बाबू लगभग हर वाक्य के प्रांरभ में तकिया कलाम की तरह करते हैं। इस वाक्यांश का उनके व्यक्तित्व और कहानी के कथ्य से क्या संबंध बनता है?

उ.३. यशोधर बाबू पूरे पाठ में सम हाउ इम्प्रोपेर शब्द का उच्चारण करते रहते हैं .सम हाउ इम्प्रोपेर का अर्थ है - कुछ गलत होगा .यशोधर बाबू ,अपने गुरु किशनदा की तरह पुरातनपंथी थे . वे आधुनिक पीढ़ी के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पाते हैं . हर बात में वे आधुनिक पीढ़ी के लोगों की नुक्ताचीनी निकालते रहते हैं .सम हाउ इम्प्रोपेर उनके जीवन में व्याप्त असंतुलन को दर्शाता है ,जो हमेशा कुछ न कुछ गलत होने की बात करता है .

प्र.4. यशोधर बाबू की कहानी को दिशा देने में किशनदा की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। आपके जीवन को दिशा देने में किसका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा और कैसे?

उ.४. यशोधर बाबू के जीवन में किशनदा का महत्व गुरु की तरह है .उनके व्यक्तित्व व कार्य प्रणाली पूरी तरह किशनदा के सिद्धांत पर चलती है .इसी तरह मेरे जीवन में माता -पिता के विचार और कार्यशैली ने मुझे आकार दिया है .मैं जीवन में उन्ही के सिद्धांतों पर चलकर सफलता प्राप्त करना चाहता हूँ .

प्र.5. वर्तमान समय में परिवार की संरचना, स्वरूप से जुड़े आपके अनुभव इस कहानी से कहाँ तक सामंजस्य बिठा पाते हैं ?

उ.५. प्रस्तुत कहानी सिल्वर वैडिंग के अनुसार हमारा जीवन भी है .वर्तमान समय में संयुक्त परिवार की प्रथा समाप्त हो रही है .लोग एकल परिवारों की ओर उन्मुख हो रहे हैं .पुराने समय में कृषि आधारित व्यवस्था होने पर संयुक्त परिवार हुआ करता था .परिवार के बड़े बुजुर्ग का ही हर फैसले में हाथ हुआ करता था .लेकिन शहरी व्यवस्था में हर व्यक्ति रोजगार करता है .इसीलिए वह परिवार के बुजुगों के अनुभवों व निर्णयों का निरादर कर रहा है . यही कारण है कि यशोधर बाबू के बच्चे के बच्चे उनकी बातें नहीं मानते हैं .नए - नए फैशन में व्यस्त रहती है . यशोधर बाबू की पत्नी भी बच्चों का साथ देती है .जिससे यशोधर बाबू के जीवन में अनिर्णय की स्थिति बन जाती है .

प्र.6. निम्नलिखित में से किसे आप कहानी की मूल संवेदना कहेंगे / कहेंगी और क्यों?
(क) हाशिए पर धकेले जाते मानवीय मूल्य
(ख) पीढ़ी का अंतराल
(ग) पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव

उ.६. उपरोक्त तीनों मूल्यों में मुझे पीढ़ी का अंतराल प्रतीत होता है .यशोधर बाबू किशनदा की तरह जीवन व्यतीत करना चाहते हैं .किशनदा पुरातनपंथी थे .जबकि यशोधर बाबू के बच्चे आधुनिक पीढ़ी के हैं और स्वयं आत्म निर्भर भी है .वे अपने अनुसार खर्च और जीवन यापन करते हैं .उनकी माँ भी उनका समर्थन करती हैं .इस प्रकार जीवन में यशोधर बाबू अकेले पड़ जाते हैं .उनके जीवन में अनिर्णय की स्थिति बनी रहती है .यह मात्र पीढ़ियों के अंतराल के कारण है .पुरानी पीढ़ी संयुक्त परिवार का समर्थन करती है . वहीँ नयी पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में हैं .

प्र.7. अपने घर और विद्यालय के आस-पास हो रहे उन बदलावों के बारे में लिखें जो सुविधाजनक और आधुनिक होते हुए भी बुज़ुर्गों को अच्छे नहीं लगते। अच्छा न लगने के क्या कारण होंगे?

उ.७. आज का जीवन आधुनिक है ,जो कि तीव्र गति से बदल रहा है .यह पूरी तरह से तकनीक पर आधारित है .तकनीक बदल जाने से लोगों के विचार प्रणाली में भी परिवर्तन आता है .अतः आज की पीढ़ी मोबाइल ,इन्टरनेट पैक ,मोटर साइकिल और छोटे कपड़ों पर आश्रित है .उसे परिवार के बड़े बुजुर्गों का सम्मान और संयुक्त परिवार प्रथा बिलकुल भी पसंद नहीं है .अतः आधुनिक जीवन बदल रहा है और पुरातन विचार व मूल्यों नेपथ्य में जा रहे हैं .

प्र.8. यशोधर बाबू के बारे में आपकी क्या धारणा बनती है? दिए गए तीन कथनों में से आप जिसके समर्थन में हैं, अपने अनुभवों और सोच के आधार पर उसके लिए तर्क दीजिए –
(क) यशोधर बाबू के विचार पूरी तरह से पुराने हैं और वे सहानुभूति के पात्र नहीं हैं।
(ख) यशोधर बाबू में एक तरह का द्वंद्व है जिसके कारण नया उन्हें कभी-कभी खींचता तो है पर पुराना छोड़ता नहीं। इसलिए उन्हें सहानुभूति के साथ देखने की ज़रूरत है।
(ग) यशोधर बाबू एक आदर्श व्यक्तित्व है और नयी पीढ़ी द्वारा उनके विचारों का अपनाना ही उचित है।

उ.८. सिल्वर वेडिंग कहानी में यशोधर बाबू के जीवन का वर्णन किया गया है .यशोधर बाबू अपने गुरु किशनदा की तरह पुराने विचारों के हैं .वे अपने बच्चों को अपनी तरह बनाना चाहते हैं ,लेकिन नयी पीढ़ी उनकी उपेक्षा करती है .यशोधर बाबू में एक तरह का द्वन्द है जिसके कारण उन्हें नया अपनी तरफ खींचता है ,जैसे भूषण द्वारा नया गाउन दिए जाने पर प्रसन्नता होती है ,लेकिन भूषण द्वारा स्वयं दूध न लाने की बात कहना ,पुराना उन्हें छोड़ता नहीं है .अतः वे पूरी कहानी में अनिर्णय की स्थिति में बने रहते हैं .इसीलिए यशोधर बाबू को सहानुभूति के साथ देखें जाने की आवश्यकता है ,ताकि हम उनका सटीक मूल्याङ्कन कर सके .



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