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मदर टेरेसा पर निबंध
Essay on Mother Teresa in Hindi


मदर टेरेसा पर निबंध Essay on Mother Teresa in Hindi - भारत में हर व्यक्ति मदर टेरेसा के बारे में जानता है .दर्द और आँसुओं से भरी इस दुनिया में मदर टेरेसा करुना की दैदीप्यमान देवदूत के समान थी .छोटे कद की अल्बानियाई नन भारत में आई और उन्होंने अपना सारा जीवन मानवता की सेवा के माध्यम से ईश्वर की सेवा में अर्पित कर दिया . लोग उन्हें उनके जीवित रहने के दौरान तथा मृत्यु के बाद भी संत के रूप में संबोधित करते रहे . 

मदर टेरेसा
मदर टेरेसा
मदर टेरेसा ने ,जैसा कि वे मानती थी ,कलकाता की सड़कों पर पड़े हजारों गरीब और दीन हीन के बीच ईश्वर की उपस्तिथि को महसूस किया .वे अत्यंत निर्धन और बेघर लोग थे जिनसे प्रेम करने वाला और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था .उनमें से अनेक लोग असध्द्य रोगों के कारण मृत्यु की कगार पर थे ,कई कुष्ठरोगी थे ,लावारिस वृद्ध थे और यहाँ तक कि मरने के लिए छोड़े गए नवजात शिशु भी थे .मदर टेरेसा ऐसे लोगों को अपने यहाँ लाती थी और प्रेम और करुणा से उनकी देखभाल करती थी . 

मदर टेरेसा का जीवन परिचय - 

मदर टेरेसा का वास्तविक नाम अग्नेसे गोंकशे बोजशियु मदर टेरसा रोमन था . वे कैथोलिक नन थीं, जिन्होंने १९४८ में स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता ले ली थी। आपने १९५० में कोलकाता में मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की स्थापना की। ४५ सालों तक गरीब, बीमार, अनाथ और मरते हुए लोगों की इन्होंने मदद की और साथ ही मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी के प्रसार का भी मार्ग प्रशस्त किया।दिल के दौरे के कारण 5 सितंबर 1997 के दिन मदर टैरेसा की मृत्यु हुई थी।यद्यपि मदर टेरेसा पहले लोरेटो कान्वेंट में काम करती थी किन्तु उन्होंने महसूस किया कि वे यहाँ रहकर गरीब लोगों की सेवा नहीं कर सकती हैं .इसीलिए अपने जीवन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने ननों का अपना धर्मसंघ बनाया जिसे सिस्टर्स ऑफ़ चैरिटी के नाम से जाना जाता है .१९६५ में इस धर्मसंघ को पॉप की मान्यता मिल गयी .आज इनकी मृत्यु के बॉस भी चार हज़ार से ज्यादा स्त्री और पुरुष सौ से अधिक केंद्र चलाकर उनके मिशनरी कार्यों को जारी रखें हुए हैं .

मदर टेरेसा का योगदान - 

मदर टेरेसा के अनुयायियों में युवा महिलाओं भी हैं जिन्होंने अत्यंत निर्धन लोगों की सेवा में अपने जीवन को समर्पित कर दिया है .वे सामाजिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि धार्मिक कार्यकर्ता हैं .उन्होंने आज्ञाकारिता और समर्पण का व्रत ग्रहणकर धर्मसंघ की सदस्यता ली है .वे ईसा मसीह द्वारा बताये गए मार्ग का अनुकरण करती हैं .

नोबल शांति पुरस्कार - 

अपने जीवनकाल में मदर टेरेसा प्रचार - प्रसार से सदैव दूर रही .किन्तु उनका विलक्षण कार्य दुनिया के सामने आने से कैसे बचा रह सकता था .अनेक महान नेताओं ने उनके कार्यों की सराहना की और नोबल शांति पुरस्कार सहित अनेकों पुरस्कार एवं सम्मान उन्हें प्राप्त हुए .उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न पुरस्कार भी प्राप्त हुआ .इस प्रचार से उन्हें गरीबों और जरूरतमंद की सेवा करने में सहायता मिली क्योंकि वे ऐसे सम्मानों को उनका सम्मान मानती थी जिनकी वह सेवा करती थी .आज जबकि वे इस संसार में नहीं है दुनिया के लोग उन्हें संत की उपाधि से घोषित किया गया ,क्योंकि मदर टेरेसा ने सदैव महान संत की तरह अपना जीवन जिया था . 



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