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जैसे को तैसा 
Jaise Ko Taisa


जैसे को तैसा Jaise Ko Taisa tit for tat Hindi Story Hindi Moral Stories for Kids. जैसे को तैसा – Tit for Tat. - एक साधु थे ,उन्हें तीर्थयात्रा के लिए जाना था ,किन्तु उनके पास कुछ सोना था ,जिससे वे परेशान थे कि सोना कहाँ रखकर जाए .पास के गाँव में एक सेठ जी रहते थे ,जिनकी इमानदार के रूप में प्रसिद्धि थी .साधु के मन में आया सेठ जी के पास रख देते हैं .जब वापस आयेंगे तो सेठ जी से वापस ले लेंगे .सेठ जी धर्मात्मा हैं ,दान - पुण्य भी करते हैं और अच्छे आदमी है . 

साधु
साधु
एक दिन साधु सेठ जी के पास गए और बोले - सेठ जी मुझे तीर्थ यात्रा करने जाना है ,मेरे पास कुछ सोना है उसे अपने पास रख लें .लौटकर आने पर मैं आपसे ले लूँगा .सेठ जी ने कहा - ठीक है ,मुझे दे दीजिये . साधु वह सोना सेठजी को देकर तीर्थयात्रा पर चले गए .एक महीने बीत जाने पर जब साधु वापस आये तब उन्होंने सेठजी के पास जाकर कहा , सेठजी ! मेरा सोना वापस दे दीजिये . 

सेठ जी ने रोनी सूरत बनाकर कहा - एक दिन मेरी गलती से अलमारी खुली रह गयी और चूहे ले वह सोना खा लिया ,अब मैं कहाँ से दूँ ? साधु चुपचाप वापस चले गए .कुछ दिन बीतने पर अचानक सेठ जी का लड़का खो गया .सेठ जी ने बहुत खोजबीन करवाई ,फिर भी लड़का नहीं मिला .सेठ जी बहुत परेशान हुए .उसी समय वे साधु आ गए और सेठ से बोले - आपके लड़के को तो चील उठा ले गयी . 

सेठ बोला - मूर्ख ! कहीं चील भी लड़के को ले जा सकती हैं ? तब साधु ने कहा ,जब चूहा सोना खा सकता तो चील लड़के को क्यों नहीं ले जा सकती हैं ? तब सेठ को अपनी गलती का एहसास हो गया ,वह समझ गया मेरे लड़के को साधु ने ही कहीं छिपाया है .यह सोचकर सेठ ने कहा - मैं तुम्हारा सोना वापस करता हूँ ,तुम मेरे बच्चे को वापस कर दो .इसे कहते हैं - जैसे को तैसा . 

कहा जाता है कि अपने से छोटे और गरीब आदमी पर कभी गुस्सा न करो ,उसे बेवजह मत डाटा करें क्योंकि समय आने पर वही गरीब व छोटा आदमी आपसे बदला भी ले सकता है .इसी प्रकार एक आदमी के पास एक खोटा सिक्का था .ट्रेन से यात्रा करते समय उसने अखबार ख़रीदा ख़रीदा और खोटा सिक्का देकर बहुत खुश हुआ परन्तु जब वह अखबार पढने लगा तो वह पुराना निकला और उसकी चालाकी बेकार हो गयी .इसीलिए गलत काम करने से पहले आदमी को अच्छी तरह सोचना चाहिए ,लेकिन बेईमानी और ठगी का पैसा तो उसके परिवार के लोग खायेंगे लेकिन फल केवल उसे ही भोगना पड़ेगा क्योंकि सुख में तो सभी साथ रहते हैं लेकिन जब दुःख भोगना पड़ेगा तो वही लोग तुम्हे छोड़कर अलग हो जायेंगे .इसी तरह की घटना से वाल्मीकि को ज्ञान हो गया था और वे डाकू से बहुत बड़े कवि और भक्त बन गए . 


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