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गरीबी और अमीरी
Garibi Aur Amiri


कुछ लोग अमीर से गरीब हो जाते हैं और कुछ लोग गरीब से अमीर हो जाते हैं .जो अमीर से गरीब हो जाते हैं ,उन्हें अपनी अमीरी नहीं भूलती ,वे रह रहकर उसे याद करते रहते हैं और अपनी पुरानी दशा को याद करके वे कभी - कभी उदास हो जाते हैं .हर व्यक्ति के साथ इस प्रकार की घटनाएं घटित होती हैं ,किन्तु मनुष्य को ज्यादा ख़ुशी या गम नहीं करना चाहिए .समभाव से रहने वाले की ही जीत होती हैं . 

गरीबी और अमीरी
गरीबी और अमीरी
मनुष्य को सदाबाहर रहना चाहिए ,पतझड़ आता है फिर बाग़ हरा - भरा हो जाता है ,फिर पतझड़ आता है .संसार का यह नियम है ,ख़ुशी के बाद गम या गम के बाद पुनः ख़ुशी आती है ,किन्तु कुछ चीज़ें ऐसी भी होती हैं ,जिनमें पतझड़ आते ही नहीं ,कोपले आने लगी हैं .जैसे आम में पतझड़ आता ही नहीं और मीठा फल भी लगता है ,इसीलिए दिवाली और अन्य त्योहारों पर घरों पर आम के पत्ते के वंदनवार लगाये जाते हैं .साथ ही ईश्वर से प्रार्थना की जाती है कि हमें भी इसी तरह पतझड़ नहीं आये .

कई बार इंसान बीतीं बातें यादकर परेशान हो जाता है ,विशेष कर वे लोग जो अमीर से गरीब हो जाते हैं ,जिनके यहाँ पतझड़ आ गया .बहार तो सबको अच्छा लगता है .किसी गरीब से पूछा जाय तो कहेगा हमारे बाप - दादा अमीर थे ,मगर हम गरीब हैं .इसका सारा दोष भगवन के मत्थे मढ दिया जाता है .कोई अपना दोष नहीं बताता है .परिवर्तन के साथ कोई - न - कोई दोष आ ही जाता है .इसी प्रकार गरीब से अमीर बननेवाले के पास गुण आ जाते हैं .गरीबी और अमीरी गुण और दोष के आधार पर होती है . 

एक इंसान ग्राहक के साथ अच्छा व्यवहार करता है और ग्राहक फिर उस दुकान पर आता है ,किन्तु कुछ लोग ग्राहक को ठगते हैं और खुश होते हैं ,लेकिन वह ग्राहक दुबारा उस दुकान पर नहीं आता .एक मूर्ख के पास एक मुर्गी थी ,जो रोज़ अंडा देती थी .उसने सोचा इसके पास अण्डों का भण्डार हैं ,क्योंकि न सारे अंडे एक साथ निकाल लूँ .उसने मुर्गी का पेट चीर डाला .इससे मुर्गी मर गयी और अंडा भी नहीं मिला . 

कुछ लोग अपना दोष छिपा लेते हैं और सारा जीवन गरीबी से बिता देते हैं .कहावत है कि जो लोग पूरा तौलते हैं ,वे ही जीवन में कमाते हैं .इसीलिए जो भी काम करो धर्म और अधर्म सोचकर करो .दो नंबर की अमीरी से एक नंबर की गरीबी अच्छी होती है . 

लेख से शिक्षा - 

  • विश्वास खो बैठना मनुष्य का अशोभनीय पतन है . 

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