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एक सपने का टूटना 


एक सपना
जो ऊगा था
गहरे अंतस में।
एक सपने का टूटना
एक सपने का टूटना 
सूर्य की ,भोर किरण सा।
गहनतम अँधेरे में
जुगनू सा ,
जीवन के तुमुलनाद में
मधुरम स्वर सा।
एक सपना !
जो उषा की अरुणाली में ,
भोर का तारा सा।
जो तुम्हारे और मेरे
गर्भनाल से जुड़ा था।
तुम्हारे संदली ,चम्पई ,
अस्तित्व के वनिबस्त।
ले रहा था शिशु आकार।
एक सपना !
जो जुड़ा था।
कल्पना के पंखों से !
तुम्हारे अपने होने के दंभ से !
संबंधों के स्तम्भ से !
न जाने क्यों रूठ गया !
निर्मम झंझा झोकों में
गर्भनाल में फूट गया।
एक सपना
शिशु बनने से पहले ही
टूट गया।
एक सपना जो ऊगा था
तेरे और मेरे गर्भनाल में।



- सुशील शर्मा

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