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कल एक दवा की दुकान पर 



इस भोथरे समय में सबसे मंद है
हमारा दिमाग
सबसे अधिक तेज है
हमलावर का चाकू
सबसे अधिक सक्रिय है वह हाथ
जिसे फेंकना है चेहरे पर तेजाब
सबसे कमजोर है
 उस आदमी की आवाज
जो बार-बार उंगलियों पर
 जोड़ रहा है हिसाब
टटोल रहा है अपनी जेब
रक्तचाप की कोई
 घटिया दवा के लिए   ।।

___   वह   ___

वह विश्वास करती है
विश्व की तमाम भाषाओं पर
इन भाषाओं में लिखी गयी
 तमाम कविताओं से
वह प्रेम करती है

 इस विश्वास से कि
इन कविताओं को
सबसे मुश्किल दिनों में
वह रख देगी चूल्हे पर

चूल्हे की आंच को छू कर कविता
बदल जाएगी रोटी में
यह मनुष्य के हित में
कविता का रूपांतरण है

यह उसके कविता पर
यकीन का कारण है      ।।

__ प्रेम  ___

उन दोनों के बीच प्रेम था
पर वह प्रत्यक्ष नहीं था
उन दोनों ने एक दूसरे को कई साल फूल भेजे
एक - दूसरे के लिये कई नाम रचे
वे शहर बदलते रहे और एक दूसरे को याद करते रहे
वे कई-कई बार अनायास चलते हुए पीछे मुड़कर देखते थे
उन्होंने कई बार गलियों में झांक कर देखा होगा
फिर कई सदियाँ बीती
वे दोनों पर्वत बने
पिछली सदी में वे बारिश बने
इतना मुझे यकीन है
इस सदी में वे ओस बने
फिर किसी सफेद फूल पर गिरते रहे  ॥

___ शब्द  ___

जब शब्दों का चेहरा उतर आये
जब शब्द बारिश में भीग कर गिला हो जाये
उसे उस मकान में लाना
जहाँ कोई कविता की बात करता हो

शब्द भूख से नहीं मरते
वे सीढ़ियों से गिर कर नहीं मरते
शब्द मरते हैं भय से
शब्दों का मरना ख़तरनाक है
एक दिन हमारे पास प्रतिरोध के लिये शब्द नहीं बचेंगे  ||


__ नींद  ___

वह बचाना चाहता है
अपनी नींद
रोहित ठाकुर
रोहित ठाकुर 
तमाम नाकामियों के बाबजूद
नींद से बाहर है गालियाँ
नींद में जो पेड़ है
उसके पत्ते हरे हैं
पीले नहीं
नींद में उसके घाव से
रिसता है शहद
नींद में वह किसी चिड़िया से
पंख उधार लेता है
घर की ओर उड़ता है   ||


___ शहर  ____

उसने धीरे से कहा -
शहर यहीं से शुरू होता है
और हम लोगों के चेहरों पर दिखा भय
हम ने एक दूसरे का नाम पूछा
हम ने महसूस किया की घर से चलते समय हमने जो सत्तू पी वह कब की सूख चुकी
हम घर से छाता लाना भूल गये थे
हम ने मन ही मन आकाश से की प्रार्थना
हम दोनों अलग-अलग दिशाओं में बढ़ रहे हैं
हमारी जमा पूंजी हमारी प्रार्थनायें हैं
किसी ने कहा था  - शहर की भीड़ में हमारा गाँव - घर बहुत याद आता है
यहाँ सिर्फ गर्म हवा बह रही है
कोलतार की सड़क पर चलते हुये हमारे पाँव पिघल रहे हैं
एक दिन हम इस अनजाने शहर में भाप बनकर उड़ जायेंगे    ।।


- यह कविता घटित है -

डाक्टर के कम्पाउंडर ने भीड़ में नाम पुकारा
पंखुड़ी
एक छोटी सी लड़की बेंच से उठती है
साथ में लड़की का पिता  झुक कर डाक्टर को
एक मैला कागज दिखाता है किसी सरकारी अस्पताल का
लड़की का चेहरा पतला है आँखें चमकती हुई हैं
डाक्टर कहता है कि शरीर में खून की कमी है
लड़की को कालाजार है
दवा से पहले खून चढ़ाना होगा
डाक्टर कहता है कि कालाजार का ईलाज सरकारी अस्पताल में सस्ता पड़ता है
प्राईवेट अस्पताल में ईलाज महंगा पड़ेगा -
सरकारी अस्पताल रेफर कर देते हैं
डाक्टर फिर कह रहा है बिना खून चढ़ाये दवा लेने पर
किडनी चट्ट से बैठ जायेगा
लड़की के पिता का चेहरा दुःख का एक मानचित्र है
लड़की पिता के साथ जा रही है
शायद हाजीपुर  ।।


___ बारिश __

बारिश के दिनों में
पानी की बूँद के छिलके फूलों पर गिरते हैं
कोई गिलहरी का गिरोह दौड़ कर पास आता है
और मायूस हो जाता है
पानी की बूँद के छिलके अखरोट के छिलके नहीं होते
एक आदमी इस उम्मीद में है कि दुःख का छिलका
उतरने के बाद सुख आता है    ॥





रोहित ठाकुर शैक्षणिक योग्यता - परा-स्नातक राजनीति विज्ञान,विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित
विभिन्न कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ
वृत्ति  - सिविल सेवा परीक्षा हेतु शिक्षण
रूचि : -हिन्दी-अंग्रेजी साहित्य अध्ययन
पत्राचार :- जयंती- प्रकाश बिल्डिंग, काली मंदिर रोड,संजय गांधी नगर, कंकड़बाग , पटना-800020, बिहार
मोबाइल नंबर-  9570352164

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