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पशुओं के प्रति क्रूरता
Cruelty to animals


कहने को तो इंसानों में बहुत सी ख़ूबियाँ और ख़ामियाँ है ।लेकिन सबसे बड़ी कमी आज है तो वो है "इंसानियत" की ।मैं ये नहीं कह रही कि इस दुनियाँ के हर इंसान में इंसानियत की कमी है लेकिन अमूक लोगों की हरकतों को देखकर तो यही लगता है कि इनमे दिल है ही नहीं ।
       
पशुओं के प्रति क्रूरता
पशुओं के प्रति क्रूरता
कुछ दिन पहले ही मैंने कुछ ऐसे videos देखे जिनमे जानवरों के साथ हो रहे सुलूक को देखकर कलेजा मुँह को आ गया ।  अवाक् सी रह गयी ।  भला ऐसा तो क्या कर दिया उन अबोल जानवरों ने जो ऐसा करने पर उतर आते है ।  ऐसी कैसी सनक है जिसमे एक बंदर को डंडे से मारा जा रहा है ।  मारता जा रहा है और बोल रहा है कुछ बोल मत, ज़्यादा आवाज़ मत कर, चुपचाप मार खा :-( ।  खून से लथपथ वो बेचारा बंदर ना तो कुछ कर पा रहा है ना ही अपने आप को बचाने में सक्षम है और न ही दर्द से कराह पा रहा है ।  इतना मारा उसे कि वह बंदर भगवान को प्यारा हो गया :(  इतना ही नहीं उसके मर जाने के बाद भी उसे पेड़ से लटका कर मार रहा था ।

दूसरे वीडियो में एक लकड़ी के ढेर में आग लगा कर उस आग में छोटे से पिल्ले को बांधकर जलाने पर उतारू है .वो पिल्ला अपने को बचाने के लिए मानो उस से भीख मांग रहा था, चिल्ला रहा था और आग से जलकर कराह रहा था ।उसकी तमाम कोशिशों के बावजूद उसे रस्सी से खींचकर उस आग में धकेलकर जला दिया ।
       
दीपिका सोनी
दीपिका सोनी
ऐसा ही एक और वीडियो जिसमें एक मिठाई की डिब्बी में पटाखे में आग लगा कर बंदर के पास रख दिया जैसे ही वह बंदर डिब्बी के पास कुछ खाने को आया और पटाखे की आवाज़ से डरकर गिर गया ।  funny video के नाम से share किया जा रहा है उस बेजुबां जानवर पर ठहाके लगा रहे है वहीँ दूसरी ओर एक बिल्ली को मगरमच्छ वाली नदी में गिरा कर उसकी जान बचाने वाली कोशिशों को देख कर हँसी ठहाके लगा कर वीडियो बना ली ।  अपनी लाख कोशिश के बाद भी बिल्ली उस मगरमच्छ का शिकार बन गई ।  हमारे भारत में माता के नाम से सम्मानित है जो गाय उसके साथ जो अपराध किया जाता है उस से तो सब वाकिफ़ है ।  कत्लखानों में सबसे ज्यादा निर्दयता गाय के साथ ही होती है ।

अरे ! ऐसा तो क्या हो गया है जो इस कदर नीचता करने पर उतर आते है लोग ?अरे इतना गुस्सा है तो बेजुबान जानवरों पर निकलने के बजाय अगर उन राक्षसों पर निकलोगे जो मासूम सी लड़कियों की ज़िन्दगी के साथ खिलवाड़ करते है, तो देश के हालात सुधर जायेंगे ।

एक अहम् बात तो ये कि जो लोग ऐसा करते है वो तो दोषी है ही साथ ही उतने ही दोषी वो है जो उन दरिंदो को रोकने की जगह वीडियो बना कर उनकी हँसी ठहाकों में शामिल होते है ।  अगर वही मोबाइल से पुलिस को बताकर उनसे मदद लेते तो शायद वो असहाय जानवर बच सकते थे ।

मेरा ये कहना है कि आखिर क्यों इतनी निर्दयता दिखाई जाती है जानवरों के प्रति ?  अरे ! उन्हें भी दर्द होता है, उनके भी दिल है, परिवार है और पूरा हक़ है उन्हें "जीने का ।"



- दीपिका सोनी
बीकानेर, राजस्थान

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