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शादी को लेकर कुछ काम  की बातें    



जिनकी शादी हो गई है वो भलीभांति यह बात जानते है कि शादी से पहले की जिंदगी और शादी के बाद की जिंदगी में बहुत फर्क है । जैसे जीवन और मृतु के बीच का फर्क । जिन पुरुषों ने शादी कर ली है उनकी बात
शादी
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छोड़िए मगर जिन्होंने शादी नहीं की, उनके लिए कुछ सलाह : शादी से पहले खुल कर जिंदगी जी लें । शादी के बाद का जीना जीने की श्रेणी में नहीं जाता ।
जरा सोचिए ! अगर कोलंबस ने शादी की होती तो क्या अमेरिका की खोज कर पाता वह ! क्योंकि वह जब अमेरिका की खोज के लिए वह घर से निकलता तो अपनी पत्नी के हजार सवालों का उसे जवाब देना पड़ता । कहां जा रहे हो ? क्यों जा रहे हो ?तुम्हारे साथ ओर कौन कौन जा रहा है ? .तुम्हारे न जाने से नहीं होगा क्या ? आगर  तुम चले गए तो यहां घर कौन चलाएगा ? कब लौटोगे ? मुझे भी साथ लेकर चलो। इसमें तुम्हें क्या परेशानी है ?  इस दुनिया में कितने जगहों की खोज हो चुकी है  और क्यों खोजना ? इससे क्या फायदा होगा ? तुम हमेशा एेसे ही चले जाते हो ? मेरा क्या होगा तुम्हें कुछ मालूम है ? पत्नी के इतने सवालों का जवाब देने के बजाय कोलंबस घर में ही रहना उचित समझता और अमेरिका की खोज नहीं हो पाती । 
भगवान का भी कारोवार मुझे समझ नहीं आता । उन्होंने इतनी सुंदर नारी बनाई । कोमल । खूबसूरत । और उसके बाद उसे पत्नी बना कर सारी अच्छाइयां गायब कर दी !
एक कहानी सुनाता हूं, एक युवक किसी बाबा के पास पहुंचा । बोला, महाराज, मैं बहुत साल जिंदा रहना चाहता हूं । 
बाबा ने कहा, वत्स शादी कर ले...
शादी करने के बाद क्या मेरी आयु बढ़ जाएगी बाबा, युवक ने पूछा...
नहीं वत्स  ! लेकिन जो लंबी उम्र की तुम्हारी इच्छा  नहीं रहेगी । 
वह युवक मुर्ख था । बाबा की बातों के पीछे का कारण न समझ पाया । उसने एक युवती से प्यार किया । आप सभी जानते हैं कि प्रेम पुरुष को आंधा बना देता है । एक दिन उसने उस युवती से कहा डार्लिंग ! मैं तुम्हारे लिए नर्क भी जा सकता हूं । कुछ दिनों बाद दोनों का विवाह हुआ । युवक की इच्छा पूरी हुई ।  अब साक्षात नर्क में उसका वास है ।  एक पुरुष की वेदना समझिए ।  उसे नारी पृथ्वी पर लाती है । तब वह रोता हुआ आता है । और एक नारी ही यह सुनिश्चित करती है कि आमृृत्यु पुरुष रोता रहे ! 
किसी भी तर्क में आखिरी तर्क नारी ही देती है । उसके बाद अगर आप मुंह भी खोलते हैं तो वह एक नये तर्क का रूप लेता है । शादी के बाद पुरुष को अपनी गलतियों को याद नहीं रखना चाहिए क्योंकि एक चीज को दो लोग याद रखें तो फायदा क्या !  आपकी पत्नी तो बार-बार आपकी गलतियांं याद दिलाएगी । 
बहुत लोग मुझसे यह सवाल करते है कि प्रेम विवाह और माता-पिता द्वारा तय किये गये विवाह में क्या फर्क है ? मैं नहीं समझ पाता कि क्या उत्तर दूं । यह एेसा सवाल है जैसे हत्या और आत्महत्या में क्या फर्क है ...? दोनों में इंसान की मौत तय है  !  
नारी के लिए विवाह का मतलब रोमांस का आरम्भ और पुरुष के लिए रोमांस का अंत । फिर भी पुरुष विवाह करता है । इससे क्या प्रमाण मिलता है कि मुर्ख कौन है ?
कुछ मुर्ख तो कईं बार विवाह करते हैं । एक लेखक ने बहुत  अच्छी बात लिखी  कि पहले विवाह का मतलब बुद्धि पर कल्पना का विजय और दूसरा विवाह आनुभूति पर आशा की जीत है । 
अंत में  : स्वतंत्रता दिवस । मुझे एसएमएस मिला । 
अगर आप विवाहित हैं तो यह संदेश आपके लिए नहीं । बाकि लोगों के लिए स्वतंत्रता दिवस की बधाई । हैपी इंडिपेंडेंस डे । 


- मृणाल चटर्जी
अनुवाद- इतिश्री सिंह राठौर



मृणाल चटर्जी ओडिशा के जानेमाने लेखक और प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं । मृणाल ने अपने स्तम्भ 'जगते थिबा जेते दिन' ( संसार में रहने तक) से ओड़िया व्यंग्य लेखन क्षेत्र को एक मोड़ दिया ।इनकी आनेवाली किताबों में से 'विडोसीट' (स्तंभ) और उपन्यास 'शक्ति' (अंग्रेजी  अनुवाद ) काफी चर्चा में है । 

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