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समस्या



युवक- सर कितना टाइम हुआ है ...?
वृद्ध- क्या पूछा आपने...?
युवक- मैंने पूछा समय कितना हुआ...टाइम ...टाइम
वृद्ध- नहीं बताऊंगा . !
युवक- नहीं बताएंगे...क्यों नहीं बताएंगे... !
वृद्ध- तुम्हें अगर समय बताया तो मेरी बड़ी समस्या हो जाएगी...
युवक- समय बताने पर नुकसान हो जाएगा...वह भला कैसे ?
वृद्ध- देखो ! अगर मैं तुम्हें टाइम बता दूं तो तुम मुझे थैंक यू कहोगे । आभार व्यक्त करोगे ।
युवक- हां सर कहूंगा ही । यह तो शिष्टाचार है ।
टाइम
टाइम
वृद्ध- कल फिर तुम मुझसे समय पूछोगे...
युवक-हां पूछ सकता हूं । उससे क्या होगा...
वृद्ध- नहीं कुछ नहीं ...लेकिन एेसे टाइम बताते-पूछते तुम मेरे पहचान वाले बन जाओगे ।
युवक-हां सर । बिलकुल संभव है ।
वृद्ध- तुम मेरा नाम और पता पूछोगे फिर...
युवक- हां सर । हो सकता है ।
वृद्ध- मेरे घर अगर तुम आए तो मैं तुम्हें चाय भी पिला सकता हूं ।
युवक- हां सर ।
वृद्ध- केवल चाय पिलाना मुझे अच्छा नहीं लगेगा , मैं तुम्हें नाश्ता भी दे सकता हूं ।
युवक-बहुत बढ़िया होगा सर ।
वृद्ध-मेरी मेहमान नवाजी से खुश होकर मेरे घर तुम्हारा फिर से आना हो सकता है ।
युवक- हां सर ।
वृद्ध -मेरी एक बहुत सुंदर बेटी है । उसकी शादी की उम्र हो गई है । तुम्हारी उससे भी दोस्ती हो सकती है ।
युवक- वेरी गुड सर । वेरी गुड ।
वृद्ध-उसके बाद दोनों में दोस्ती गहरी हो सकती है ।
युवक- नो सर ...इतनी जल्दी...नहीं...
वृद्ध- एेसा होने की बहुत संभावना है ।
युवक- हां सर...संभावना तो हेै ।
वृद्ध- उसके बाद तुम मेरी बेटी से बार-बार मिल सकते हो ।
युवक-हां सर ।
वृद्ध- मेरी बेटी को तुम सिनेमा भी दिखाने ले जा सकते हो ।
युवक- हां सर ।
वृद्ध- पार्क में भी घूमाने ले जा सकते हो ।
युवक-हां सर ।
वृद्ध-कईं मुलाकातों के बाद तुम दोनों का प्यार और गहरा हो सकता है ।
युवक- हां सर । हो सकता है ।
वृद्ध- उसके बाद एक दिन तुम घर आकर मुझसे मेरी बेटी का हाथ मांग सकते हो ।
युवक- हो सकता है सर ।
वृद्ध- तुम यह कह सकते हो कि तुम मेरी बेटी से शादी करना चाहते हो ।
युवक- हां सर, कह सकता हूं ।
वृद्ध- वही तो मेरी समस्या है ।
युवक- क्या समस्या है सर ?
वृद्ध- सुनो  !  एेसे लड़के को कभी भी मैं अपना दमाद नहीं बनाऊंगा जिसके पास समय देखने के लिए  घड़ी तक नहीं ।

- मृणाल चटर्जी
अनुवाद- इतिश्री सिंह राठौर



मृणाल चटर्जी ओडिशा के जानेमाने लेखक और प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं । मृणाल ने अपने स्तम्भ 'जगते थिबा जेते दिन' ( संसार में रहने तक) से ओड़िया व्यंग्य लेखन क्षेत्र को एक मोड़ दिया ।इनकी आनेवाली किताबों में से 'विडोसीट' (स्तंभ) और उपन्यास 'शक्ति' (अंग्रेजी  अनुवाद ) काफी चर्चा में है। 

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