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माँ कहती हैं


माँ कहती हैं .....
अब सीखनी होगी तुम्हे
सहमी सी हँसी  औरतो वाली
तुम्हारी ये खनकती हँसी
आकर्षित करती होगी
मीनाक्षी वशिष्ठ
मीनाक्षी वशिष्ठ
आस- पास के पुरुषों को
एक उम्मीद जगाती होगी
और ये समाज
हँसती मुस्कुराती
लड़कियों  को
झट से दे देता है प्रमाणपत्र
'बदचलन' होने का  ...!
मैं कहती हूं
आकर्षित  तो हमारा रोना भी
कर सकता है ...
पुरुषों को , , , ,!
उम्मीद जगा सकता है !!ं
शायद ! हम रोने के लिये
उनका काँधा ही चुन लें , , ,!
अनहोनी की आशंका से , ,
बस हँसने पर पाबंदी क्यो...?
माँ कहती हैं .....
सीखना होगा दर्द छुपाना
छुप छुप रोना और  शर्माना
हाँ और ना में सर को हिलाना
आँखे झुकाकर बस मुस्काना
तुम्हे सीखना होना.....!
यही शर्त हैं
लड़की के बड़े होने की, ,
खुश  रहने की .. ....!
नही दौड़ सकती अब तुम
रंग -बिरंगी तितलियों के पीछे
सीखना होगा तुम्हे
नजाकत़ से चलना
हँसी रोकना
दर्द छुपाना
सीखना  होगा ||
भूल के सारे तर्क -कुतर्क
बड़ों  की हाँ में हाँ मिलाना ,
सीखना होगा ||
चोटी  बाँधना
सारी बाँधना
मन बाँधना
इच्छाओं पर बाँध लगाना
सीखना होगा ||
इतने बाँधो का दवाव
 कैसे सह  पाऊंगी ..!
इतने बदलाव के बाद
भला मुझमें 'मैं'
कहाँ  रह जाऊंगी !!


मीनाक्षी वशिष्ठ
जन्म स्थान ->भरतपुर (राजस्थान )
वर्तमान निवासी टूंडला (फिरोजाबाद)
शिक्षा->बी.ए,एम.ए(अर्थशास्त्र) बी.एड
विधा-गद्य ,गीत ,प्रयोगवादी कविता आदि ।

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  1. इला जायसवालजून 09, 2018 4:37 pm

    कविता 'माँ कहती है' बहुत ही मार्मिक एवं हृदयस्पर्शी है|

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