0
Advertisement

मुल्तवी


जिनकी खातिर कर रहे हैं जीना मुल्तवी
यादों का जनाज़ा ढोयेंगे कितने रोज़?
मुल्तवी
मुल्तवी

होने को आप जिनके किसीके न हो सके
सोचा हे वो भी आपके होएंगे कितने रोज़?

जूनून ए समंदर में कश्ती डुबोने वाले
अश्क़ उनके तेरा अक्स भिगोएँगे कितने रोज़?

आपकी कुर्बानियां आपकी तस्वीरें
आपकी वफायें संजोयेंगे कितने रोज़?

बिस्तर सजा रहे हैं नींदों को बेच कर
कौन जाने इस पर सोयेंगे कितने रोज़?



तन्हाई


मुखातिब-सी लगे है ख़ामोशी
गुफ्तगू-सी करे तन्हाई है


हमारे साथ कोई तो होता
हमारे साथ क्यों तन्हाई है?


कहाँ से भाग कर कहाँ जाएँ
हर तरफ दूर तक तन्हाई है


किस कदर बेपनाह तन्हाई है
बेसबब बेवज़ह तन्हाई है


एक बेपर के परिंदे की तरह
खुदबखुद कैद-सी तन्हाई है


किसी के दिन किसी की रातों में
किसी की रूह में तन्हाई है


- राजहंस गुप्ता 

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top