1
Advertisement

मेरी जीत होगी



सुनो,
तुम दाब दो मेरा मुँह,
काट दो मेरी जीभ,
मेरे गले के भीतर डाल दो सरिया,
बंद कर दो सब ध्वनि द्वार मेरे,
मैं चुप ना रहूँगी,
शिवांगी चौबे
शिवांगी चौबे
मैं फिर भी कहूँगी,
मैं फिर भी कहूँगी,
ना पहनूँगी पायल,
ना बाँधूँगी गजरा,
ना कुमकुम, ना चूड़ी,
ना जकड़ूंगी खुद को,
तुम खींचना मेरी सांसें,
मैं पकड़ूंगी खुद को,
मगर जो कहोगे कि
पंख ला न दोगे,
तो निकल जाउंगी,
ले के लाल ही दुपट्टा,
उडूंगी नहीं तो गिरूँगी सही,
लेकिन मेरी जीत होगी मेरी,
सुनो,
बंद कर दो किवाड़े भी घर के,
मैं छत से ही देखूंगी सारे सितारे,
बुन लूँगी सीढ़ी आसमां तक का भी तब,
उड़ जाउंगी छोड़ पिंजड़े तुम्हारे,
पर मेरे फेफड़ों को जो जकड़ोगे तुम तो,
हवाओं का रुख मोड़,
एक चीख मैं भी लगाउंगी कस कर,
निकल जाएंगे सारे तेवर तुम्हारे,
सुनो,
मैं नहीं कोई मोम की गुड़िया,
ना कुत्ता, ना बिल्ली,
ना चौका, ना बेलन,
मैं हूँ पानी कलकल,
मैं हूँ बिजली चंचल,
मैं हूँ वो जो तुम हो,
या मैं हूँ तो तुम हो,
ना भूलो कि कोख़ है मेरे भीतर ही,
ना भूलो की आग भी इसी दिल में है,
मैं चिंगारी बन के जो बरसूँगी तुम पर,
जल जाओगे तुम तो,
लेकिन जलेगी ये सृष्टि भी सारी,
जो चलने दोगे ना अब तुम हमारी,
सुनो,
छोड़ दो तुम ये चोंचले पुराने,
कि मैं आयी जग में दो रोटी पकाने,
नहीं मैं नदी हूँ कि सिमटूंगी तुम में,
मैं खुद हूँ समंदर, है सबकुछ मुझी में,
नहीं हूँ तुम्हारी, ना कल भी रहूँगी,
मैं पहले हूँ मेरी और अपनी कहूँगी,
मैं हूँ प्रकृति, मैं हूँ दाता तुम्हारी,
पर इस बार आई है मेरी भी बारी,
और इस बार बातें जो तुमने बिगाड़ी,
तो विनाशों का कारण भी होगी ये नारी।


- शिवांगी चौबे
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय


एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top