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क्या सीखा तुमने ? 


पत्तियों पर
चढ़ लुढ़कना
बूँद
बूँद
बह जाना
ढह जाना
क्या सीखा तुमने ?
हे!बूँद ।

ताप में
भाप बन उड़ जाना
अदृश्य कोशों दूर
क्या सीखा तुमने ?
हे!बूँद ।

कभी बर्फ बन जाना
जम जाना
पर्त दर पर्त
बन बौछार
झाँकना खिड़कियों से
क्या सीखा तुमने ?
हे! बूँद ।

   

- अशोक बाबू माहौर 

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