0
Advertisement

हम पंछी उन्मुक्त गगन के
hum panchhi unmukt gagan ke


हम पंछी उन्मुक्त गगन के,
पिंजर बद्ध न गा पाएंगे
पंछी
पंछी
कनक तीलियों से टकराके
पुलकित पंख टूट जायेंगे |

हम बहता जल पीने वाले
मर जायेंगे भूखे प्यासे
कहीं भली है कटुक निबोरी
कनक कटोरी की मैदा से |

स्वर्ण श्रंखला के बंधन मे
अपनी गति उड़ान सब भूले
बस सपनों मे देख रहे हैं
तरु की फुनगी पर के झूले !

ऐसे थे अरमान की उड़ते
नील गगन की सीमा पाने
लाल किरण सी चोंच खोल
चुगते तारक अनार के दाने !

होती सीमा-हीन क्षितिज से
इन पंखों की होडा-होडी,
या तो क्षितिज मिलन बन जाता
या तनती साँसों की डोरी !

नीड न दो चाहे टहनी का
आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो,
लेकिन पंख दिए हैं तो
आकुल उड़ान मे विघ्न न डालो !


– शिवमंगल सिंह "सुमन"




keywords - 
हम पंछी उन्मुक्त गगन के की व्याख्या हम पंछी उन्मुक्त गगन के भावार्थ हम पंछी उन्मुक्त गगन के सारांश हम पंछी उन्मुक्त गगन के प्रश्न उत्तर हम पंछी उन्मुक्त गगन के कविता की व्याख्या हम पंछी उन्मुक्त गगन के कविता का सार हम पंछी उन्मुक्त गगन के मीनिंग इन हिंदी हम पंछी उन्मुक्त गगन के व्याख्या hum panchhi unmukt gagan ke poem explanation hum panchhi unmukt gagan ke saransh hum panchhi unmukt gagan ke question answer hum panchhi unmukt gagan ke word meaning hum panchhi unmukt gagan ke prashn uttar hum panchhi unmukt gagan ke video hum panchi unmukt gagan ke poem in hindi summary meaning of poem hum panchi unmukt gagan ke in hind

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top