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दया धर्म - बच्चों की कहानियां 

दया भाव
दया भाव 
संयुक्त राज्य अमेरिका के एक राष्ट्रपति एक बार राज्यसभा में जा रहे थे .रास्ते में उन्होंने एक सूअर को कीचड में धंसे देखा .सूअर कीचड़ से निकलने के लिए जी - तोड़ प्रयत्न कर रहा था .पर वह जितना प्रयत्न करता ,उतना ही अधिक कीचड़ में धंस जाता .सूअर की यह दयनीय दशा देखकर राष्ट्रपति से नहीं रहा गया .वे अपनी उसी पोशाक सहित कीचड़ में कूद पड़े और सूअर को खींचकर बाहर निकाल लाये .समय हो गया था इसीलिए वे उन्ही कीचड़ भरे कपड़ों को पहने राज्यसभा में गए .
सभा के सदस्य उन्हें इस दशा में देखकर अचरज में पड़ गए .लोगों के पूछने पर उन्होंने सारा हाल सुनाया .सब लोग उनकी दयालुता की भूरि - भूरी प्रशंसा करने लगे .इस पर राष्ट्रपति महोदय ने कहा - आप लोग व्यर्थ ही मेरी तारीफ़ कर रहे हैं .मुझे सूअर पर कोई दया नहीं आई थी ,उसे बुरी तरह कीचड में फँसे देखकर मुझे बहुत दुःख हुआ और मैंने अपने दुःख को मिटाने के लिए उसे बाहर निकाला .इसमें मैंने सुआर की कोई भलाई नहीं की बल्कि अपनी ही भलायी की है क्योंकि उसे बाहर निकालते ही मेरा दुःख दूर हो गया .असल में प्राणिमात्र के दुःख से दुखी होकर उन्हें दुःख से छुड़ाने की चेष्टा का नाम ही तो दया है . 


कहानी से शिक्षा - 

१. सभी प्राणिमात्र में दया भाव रखनी चाहिए . 
२. अपने पद व धन का घमंड नहीं करना चाहिए .

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