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अम्मा 


अम्मा घर का शगुन है ,ईश्वर का उपहार।
अम्मा  खुश्बू फूल की ,अम्मा मंद बयार।

धरती से अम्बर तलक ,ढूंढा मैंने खास।
अम्मा
अम्मा
अम्मा सरीखा न मिला ,कोई रिश्ता पास।

गम हो दुख हो या ख़ुशी ,अम्मा देती साथ।
हर मन्नत मुझको मिली ,सर पर उसका हाथ।

जेठ दुपहरी से लगें ,सारे रिश्ते मौन।
अम्मा नदिया सी बहे ,उससे निर्मल कौन।

अम्मा के पीछे फिरूं ,लेकर आँचल हाथ।
अम्मा आंगन झाड़ती ,लेकर मुझ को साथ।

शब्दों के संसार में ,गढ़ता भाव के चित्र।
दुश्मन जैसे सब लगें ,अम्मा मेरी मित्र।

बेटी में अम्मा दिखे ,अम्मा सुता समान।
इन दोनों के नेह से ,जीवन की पहचान।

अम्मा सुबह अज़ान है ,संध्या भजन पवित्र।
चर्च इबादत सी लगे ,अम्मा ज्ञान चरित्र।

अम्मा मिसरी की डली ,अम्मा दही की चाट।
मालपुआ सी वो लगे ,अम्मा बेसन खाट।

अम्मा बरगद पेड़ सी ,मैं उसका हूँ पात।
जीवन तपता धूप सा ,अम्मा है बरसात।


- सुशील शर्मा

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