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आपसी लड़ाई का फल बच्चों की कहानियाँ


किसी जंगल में एक शेर और एक चीता रहता था . वैसे तो शेर बहुत बलवान होता है .किन्तु वह शेर बूढ़ा होता है
शेर और चीता
शेर और चीता
.उससे दौड़ा कम जाता था .चीता ,मोटा और बलवान था .इतने पर भी चीता बूढ़े शेर से डरता था और उससे मित्रता रखता था ,क्योंकि बूढ़ा होने पर भी शेर चीते से कुछ अधिक बलवान था ही .

एक बार कई दिनों तक शेर और चीते में से किसी को कोई शिकार नहीं मिला .दोनों बहुत भूखें थे .उन्होंने देखा कि एक छोटा सा हिरन पास में ही चर रहा है .चीते ने शेर से कहा - मैं हिरन को पकड़ता हूँ .लेकिन आप उस नाले के ऊपर बैठ जाएँ .जिससे हिरन नाले में भागकर छिप न सके .शेर नाले पर बैठ गया .चीते ने हिरन को दौड़कर पकड़कर लिया और मार डाला .लेकिन हिरन बहुत छोटा था .उससे दो में से किसी की ही भूख मिट सकती थी .दोनों भूखें थे ,इसीलिए दोनों के मन में लालच आया .चीता कहने लगा - हिरन को मैंने अकेले ने मारा है ,इसीलिए मैं ही खाऊंगा . 

शेर बोला - मै जंगल का राजा हूँ .हिरन मैं खाऊंगा .तुम तो दौड़ सकते हो ,दौड़कर दूसरा शिकार पकड़ों . 
दोनों का झगडा बढ़ गया .वे आपस में दांत और पंजों से लड़ने लगे .झाड़ी में छिपा एक सियार यह सब बातें देख रहा था . 

जब शेर और चीते ने एक दूसरे को पंजों और दांतों से बहुत घायल कर दिया और दोनों भूमि पर गिर पड़े तो सियार झाड़ी से निकाला .वह हिरन को घसीट कर झाड़ी में ले गया और खाने लगा .शेर और चीते में से कोई उठ भी नहीं सकता था .वे देखते ही रह गए .जब दो व्यक्ति किसी वस्तु के लिए लड़ने लगते हैं तो उन दोनों की हानि होती है .लाभ तो कोई तीसरा ही उठाता .इसीलिए आपस में लड़ना नहीं चाहिए .कुछ हानि भी हो तो उसे सहकर मिलजुल ही करना चाहिए . 


कहानी से शिक्षा - 
१. आपस में लड़ना नहीं चाहिए .
२. कुछ हानि भी हो तो उसे सहकर मिलजुल ही सहना चाहिए .


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  1. बहुत सुंदर कथा इस कथा पर मराठी में एक कहावत हैं "दोघांच भांडण तिसऱ्याचा लाभ" यानि दोनों का झगड़ा और तीसरे को फायदा.

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