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रुपये की आत्मकथा rupaye ki atmakatha
Essay on Autobiography of Money in Hindi


रुपये की आत्मकथा rupaye ki atmakatha in hindi - मैं रूपया हूँ . इस संसार में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु हूँ .सभी लोग मेरी गुणवत्ता से परिचित हैं .मेरे बिना कोई लेन - देन नहीं होता है .कोई भी साधारण से लेकर असाधारण वस्तु भी मेरे बिना नहीं ख़रीदा जा सकता है . दुनिया में सभी मनुष्य मेरे लिये ही काम करते हैं . पूरा संसार ही मेरे लिए दौड़ लगाता है .लोग मेरे लिए ही सभी तरह के अपराध ,बेईमानी ,धोखाधड़ी करते हैं .अपने मित्र और परिजनों को लोग ही मेरे कारण भूल जाते हैं . 

रुपये का जन्म - 

रूपया
रूपया
मेरा जन्म मनुष्य की सभ्यता के विकास के साथ ही हुआ .पहले ही वस्तु का आदान - प्रदान करके ही अपने लेन देन करते थे . मेरा निर्माण एक धातु के रूप में हुआ . मुझे बहुत सारे रासायनिक प्रयोगों और परीक्षाओं से गुजार कर मेरा वर्तमान रूप दिया गया .कभी मेरा निर्माण ताँबे में , कभी सोने में ,कभी चाँदी और कभी काँसे में हुआ .आधुनिक समय में मै विकसित होता हुआ कागज़ के रूप में आ गया . 

रुपये की विकासयात्रा - 

मुझे बहुत जगहों और लोगों के पास यात्रा करनी पड़ती है . सबसे पहले मुझे लोग टकसाल से निकाल कर अत्यंत सुरक्षित स्थान ले जाते हैं .इसके बाद मैं बैंक जाता हूँ और वहां से आम जनता के पास जाता हूँ . मुझे व्यापारी ले जाता है और अपनी तिजोरी में बंद कर देता है . कर्मचारी भी अपने घर ले जाकर मुझे सुरक्षित स्थान पर रखता है और अपने खर्चों को पूरा करता है .यहाँ तक की छोटे छोटे बच्चे भी मुझे बहुत नाज़ुक रूप से सँभालते हैं . कुछ गरीब व्यक्ति मेरी सुरक्षा का इतना ख्याल रखते हैं कि मुझे जमीन में गाड देते हैं .तब मुझे दुःख होता है .

रुपये का कल्याणकारी प्रयोग - 

सारी दुनिया मेरा महत्व जानती है .मुझे पाकर रंक राजा बन जाता है और मुझे खोकर राजा रंक बन जाता है . मेरे द्वारा मुर्ख को विद्वान ,अभागे को भाग्यवान बनने की पुरानी परंपरा रही है . बिना मेरी सहयता के संसार का कोई भी कार्य नहीं हो सकता है .संसार मुझे पाने के लिए काम करता है . रात दिन लोग कार्यालयों में ,कारखानों में ,दुकानों में ,खेतों में काम करते हैं .सभी का लक्ष्य यह होता हैं कि रूपया कैसे भि करके उन्हें मिल जाए . संसार भर में सभी काम मेरे ही माध्यम से संपन्न होता है .तभी तो लोग मुझे अपने प्राणों से भी अधिक प्यार करते हैं .मेरा उपयोग यदि मनुष्य जाति सही प्रकार से करें तो सभी का भला हो सकता हैं . नहीं तो सभी का विनाश होना तय हैं .अतः मनुष्यों को रुपये का प्रयोग कल्याणकारी कार्यों के लिए प्रयोग करना चाहिए . 


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