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एक मजदूर की आत्मकथा
Essay on Labourer in Hindi
majdur ki atmakatha in hindi


एक मजदूर की आत्मकथा  Labourer in Hindi majdur ki atmakatha in hindi - मैं एक मजदूर हूँ . मजदूरी करना ही मेरा जीवन है .मेरा न तो कोई धर्म है और न ही जाती .मेरे मजदूरी करने का कारण मेरे गरीब घर में पैदा होना है .मई अभावों के सहारे जीवन व्यतीत कर रहा हूँ .मेरे भाग्य में ही मजूरी करना लिखा है .मेरे पूर्व जीवन में भी मजदूरी करना लिखा था और आज और कल भी मैं मजदूरी करूँगा . मैं कभी आराम का जीवन नहीं जिया .गरीबी के कारण पढाई - लिखाई भी नहीं कर सका .इसीलिए अनपढ़ हूँ . 

मजदूरी करना भाग्य - 

मुझे कोई मेरे असली नाम ने नहीं पुकारता है .मुझे कोई रामू या श्यामू या छोटू कह कर ही बुलाता है .मैं हर
मजदूर
मजदूर
जगह काम कर लेता हूँ चाहे वह खेत हो ,कारखाने में काम हो ,होटल में काम हो .जिस दिन मैं काम न करूँ ,उस दिन मेरे घर चूल्हा न जले ,यानि मेरी हालत रोज़ कुँवा खोदने और रोज़ पानी पीने की हो गयी है . मुझे अपने परिवार के सभी सदयों को मजदूरी पर लगाना पड़ता है ताकि सभी अपना पेट भर सके .इस मँहगाई के ज़माने में मेरे छोटे बच्चे भी चाय के दुकानों में काम कर लेते हैं ,जिससे घर का कुछ खर्च निकल आये . 

जीवन की विडम्बना - 

हमें साल के बारह महीने और हर दिन काम करना पड़ता है .चाहे सर्दी ,गर्मी ,बरसात तो हमें काम करना ही पड़ता है .हमारे जीवन की विडम्बना यह है कि हम भवन बनाते हैं लेकिन हमें फूटपाथ पर सोना पड़ता है ,हम अन्न उपजाते हैं लेकिन स्वयं भूखें सोना पड़ता है .हम कपडे की मीलों में काम करते हैं लेकिन खुद के लिए वस्त्र नहीं होते हैं . 

मजदूर का जीवन - 

हम वास्तव में कोल्हू के बैल के समान है .हमारा शोषण किया जाता है . हमें समान काम के समान वेतन नहीं मिलता है .कभी कभी मालिक वर्ग पैसे भि नहीं देता है .हम न पुलिस की मदद ले सकते हैं और न ही न्यायलय की शरण ले सकते हैं . हम बिना इलाज़ के मर जाते हैं . 

मजदूर वर्ग में एकता - 

हम मजदूर वर्ग में एकता नहीं है .हमें एक साथ यदि आये तो अपने शोषण और अत्याचार का डट कर मुकाबला कर सकते हैं . हमें भी अच्छा जीवन जीने का हक है . हमें सबके साथ समानता का व्यवहार चाहिए . हमें समान कार्य के लिए समान वेतन चाहिए . पेट भर खा सके . अच्छे कपडे पहन सके .बीमारी के समय चिकित्सा की व्यवस्था हो .इन सब लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हमें सरकार के पास जाना चाहिए .कानून में बदलाव करके हमारा जीवन सुधर सकता है .हमारी मजदूर संघ को भी अपने मजदूर भाइयों के लिए संघर्ष करना चाहिए तभी हम वास्तव में मनुष्य का जीवन जी पायेंगे . 


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