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झूला 


आओ हम सब झूला झूलें .
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें ..

हैं बहार सावन की आई .
देखों श्याम घटा नभ छाई ..
अब फुहार पड़ती है भाई .
ठंडी - ठंडी अति सुखदायी ..
आओ हम सब झूला झूलें .
पेंग बढ़ाकर नभ को छूलें ..

कुहू - कुहू कर गाने वाली .
प्यारी कोयल काली - काली .
बड़ी सुरीली भोली - भाली .
गाती फिरती है मतवाली .
हम सब भी गाकर झूलें .
पेंग बढ़कर नभ को छूलें ..

मोर बोलता है उपवन में .
मस्त हो रहा है नर्तन में ..
चातक भी बोला वन में .
आओ हम सब झूला झूलें .
पेंग बढ़कर नभ को छूलें ..



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  1. झुला हमें बचपन की याद दिलाता है, बहुत बढ़िया प्रस्तूती.

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