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डाक टिकट की आत्मकथा
daak ticket ki atmakatha in hindi


मैं एक डाकघर के काउंटर पर कुछ उत्तेजना की प्रतीक्षा में चिंतित पड़ा हुआ था .मेरा जन्म कुछ सप्ताह पहले ही हुआ था .मैं हरे रंग का हों और मेरे ऊपर लाल गुलाब की तस्वीर छपी हुई है .मुझे भारत के युगपुरुष पंडित जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिवस पर विशेष रूप से बनाया गया था .प्रत्येक दिन लोग लिफाफे ,अंतर्देशीय पत्र ,पोस्टकार्ड तथा डाक टिकट खरीदने डाकघर में आते हैं .मेरे कई मित्र बेचे जा चुके थे .मैं नीरस और बेचैन पड़ा था .
डाक टिकट
डाक टिकट
और एक दिन एक घटना घटित हो गयी .एक दिन दोपहर के बाद एक वृद्ध महिला एय्रोग्राम खरीदने डाकघर में आई .वह एक पत्र समुद्रपारीय किसी देश के स्थान पर भेजना चाहती है .जो क्लर्क काउंटर पर बैठा हुआ था उसके पास को एय्रोग्राम उपलब्ध नहीं था .इसीलिए उस महिला ने अपने पत्र को एक लिफाफे में द्दलकर उस पर स्टाम्प चिपकाने का निर्णय लिया .मेरा ह्रदय उत्तेजना से धड़क रह था .और जीन हाँ ! अंतत मेरे एनी साथियों के साठग मुझे भी उठा और उस लिफाफे पर चिपका दिया गया .वह महिला मुझे अपने साथ लेकर अपने घर आई .जब तक उसने मुझे पत्र लिया मैं और मेरे मित्र प्रतीक्षा करते रहे .अगली सुबह हमें एक डाक के डिब्बे में दाल दिया गया . 

हमें अँधेरे में ,ठूसे हुए डाक के डिब्बे में अभूत अधिक देर तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी . डाकिया आया और हमें दूसरे डाकघर लेकर गया . उन्होंने मेरे चेहरे पर काला ठप्पा लगा दिया .इससे मेरा रूप बिगड़ गया किन्तु मैंने बुरा नहीं माना . मैं केवल रोमांच चाहता था .हमें अन्य पत्रों के साथ एक डाक के थैले में डाल दिया गया और हवाई जहाज़ से इस सुन्दर शहर में भेज दिया गया .वृद्ध महिला के बेटा डाक टिकट संग्रहकर्ता है .उसने जब अपनी माँ का पत्र पाया तो बड़ा प्रसन्न हुआ .उसने बड़ी सावधानी से मुझे बाहर निकाला और अब मैं उसके स्टाम्प एल्बम में बहुत अच्छी तरह से रख दिया गया हूँ . 

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