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बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा  Buddha Purnima - बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का एक प्रमुख त्यौहार है। बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती  वैशाख माह की  पूर्णिमा को मनाया जाता हैं।पूर्णिमा के दिन ही भगवान गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण समारोह भी मनाया जाता है।भगवान गौतम बुद्ध की जन्म  और उनके निर्वाण दिवस दोनों के ही  मनाया जाता है. इसी दिन भगवान बुद्ध को  ज्ञान निर्वाण प्राप्त हुआ था.

महात्मा बुद्ध का जीवन परिचय - 

महात्मा बुद्ध का जन्म सन ५६९ ई.पू .पूर्व लुम्बनी नामक स्थान में  हुआ था .उनके पिता शुद्धोधन कपिलवस्तु के
महात्मा बुद्ध
महात्मा बुद्ध
राजा थे . महात्मा बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था .जन्म के समय ही ज्योतिष्यों के यह भविष्यवाणी की थी कि आगे चल सिद्धार्थ एक महान संत या महान राजा बन सकते हैं . उनका विवाह यशोधरा नामक राजकुमारी से हुए और उन्हें राहुल नामक पुत्र भी हुआ . एक बार यात्रा के समय एक बूढ़े ,बीमार व्यक्ति और मृत व्यक्ति को देखकर उन्हें संसार से विरक्ति हो गयी .एक रात उन्होंने २९ वर्ष की आयु में गृह त्याग कर दिया .
६ वर्ष की घोर तपस्या के बाद उन्हें निरंजना नदी के तट पर एक पीपल के वृक्ष के नीचे उन्हें निर्वाण की प्राप्ति हुई . यह दिन वैशाख शुक्ल पूर्णिमा के दिन वह ज्ञान प्राप्ति के कारण सिद्धार्थ  से भगवान् बुद्ध कहलाये . 
महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया . श्रवास्ती कोशल की राजधानी में बुद्ध ने सर्वाधीक उपदेश दिए थे .यहाँ पर उन्होंने २१ विश्राम स्थलों पर प्रवास किया था .मनुष्यों की अँगुलियों को काटकर माला पहनने वाले कुख्यात डाकू अंग्लुमाल को श्रावस्ती में भी भगवान् बुद्ध ने बौद्ध धर्म में दीक्षा दी थी . ४८३ ई. पू. में ८० वर्ष की आयु में, देवरिया जिले के कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त किया था।

महात्मा बुद्ध की शिक्षा - 

भगवान् बुद्ध ने पाली भाषा में अहिंसा ,सत्य ,करुणा आदि की शिक्षा प्रदान की .बुद्ध ने निर्वाण की प्राप्ति एवं दुखों से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत सरल एवं सहज मार्ग को प्रतिपादित किया ,जिसे अष्टांगिक या माध्यम मार्ग कहते हैं जिनमें प्रमुख है - 
१. सम्यक दृष्टि 
२. सम्यक संकल्प
३. सम्यक वाणी 
४. सम्यक कर्म 
५. सम्यक आजीव
६. सम्यक व्यायाम 
७. सम्यक स्मृति 
८. सम्यक समाधि

बौद्ध धर्म का प्रचार - 

भगवान् बुद्ध के अनुसार मध्यम मार्ग का अनुसरण करना चाहिए जिसमें अत्यधिक विलासिता या अत्यधिक तप दोनों ही नहीं होने चाहिए . बौद्ध धर्म का विकास बहुत तीर्व गति से हुआ .इसके उद्भव से लेकर १२ वीं शताब्दी तक यह धर्म अन्तराष्ट्रीय धर्म बन गया . तिब्बत ,चीन ,जापान ,मध्य एशिया में इसका व्यापक प्रचार हुआ . बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद भी अशोक और कनिष्क जैसे शासकों ने बौद्ध धर्म के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई . हमें अपने जीवन में महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को स्थान देना चाहिए . जीवन में सत्य ,अहिंसा ,करुणा आदि को महत्व देना चाहिए . 

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