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आदिकाल की परिस्थितियाँ

हिंदी साहित्य के प्रथम काल को सिद्धकाल , सिद्ध समंत्काल ,वीजवपनकाल ,चरनकाल आदि अनेक नामों से संबोधित किया जाता है . हिंदी साहित्य के प्रथम काल को आचार्य शुक्ल वीरगाथाकाल कहते हैं .हिंदी साहित्य के वीरगाथाकाल या आदिकाल की राजनितिक ,सामाजिक ,धार्मिक तथा साहित्यिक परिस्थितियाँ  इस प्रकार थी -

१. राजनितिक परिस्थितियाँ -

 आदिकाल काल का राजनितिक इतिहास राजपूतों के उत्थान - पतन तथा मुसलामानों के आक्रमण एवं उनके शासन स्थापना का इतिहास है . इस काल में देश को की एक सुद्रिधं एवं केन्द्रीय शासन का अभाव था . सम्पूर्ण राष्ट्र छोटे - छोटे टुकड़ों में विभक्त था . सम्राट हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद केन्द्रीय शासन अत्यधिक कमजोर हो गया . इसी बीच महमूद गजनवी ने देश पर आक्रमण करके देश की राजनितिक धारा को मोड़ दिया .इसके बाद विदेशी मुसलमान शक्तियों ने बराबर आक्रमण करके मुस्लिम शासन का मार्ग खोल दिया . इस काल में पारस्परिक युध्य एवं वाह्र आक्रमणों ने ऐसा वातावरण बना दिया कि साहित्यकारों को विवश होकर वीरगाथात्मक रचनाओं को लिखना पड़ा. इन रचनाओं का उद्देश्य समाज को इस योग्य बनाना था कि वे देश के लिए अपने प्राणों को बाजी लगा सके .


२. सामाजिक परिस्थितियाँ - 

आदिकाल काल में समाज मुख्य रूप से दो वर्गों में बंटा हुआ था - एक सेवक दूसरा सेव्य. सेव्य वर्ग में राजा ,सामंत एवं सामंत एवं सरदार तथा सेवक वर्ग में प्रजा ,दास ,दासी , भांट ,वेश्या आदि थे . सेवक वर्ग दूसरे वर्ग की सेवा और मनोरंजन में लगा रहता था . राजपूत वर्ग स्वार्थ ,अहंकार एवं संकीर्णता से परिपूर्ण होकर राजनैतिक एकता को खंडित कर रहा था . समाज में जाति - पाँति सम्बन्धी भेद - भाव था . स्त्रियाँ में आत्म - उत्सर्ग की भावना थी , वे जौहर व्रत में विश्वास रखती थी .उस काल में पत्नी वीर पति की ,बहन वीर भाई की और माताएँ वीर पुत्र की कामना करती थी .


३. धार्मिक परिस्थितियाँ - 

आदिकाल काल में धार्मिक एकता भी संतोषजनक न थी . बौद्धधर्म का लगभग पतन हो चुका था फलतः ब्राह्मण धर्म तथा वर्णाश्रम व्यवस्था पुनर्जीवित हो रहे थे . हिन्दू धर्म अनेक संप्रदायों में विभक्त था . शैवों में कापालिक ,भैरवी शक्ति जग रही थी तो लिंगायत संप्रदाय आडम्बर का विरोध कर रहा था . हठयोग और शक्ति संप्रदाय का प्रचार चल रहा था . इसी समय इस्लाम धर्म का प्रवेश हुआ और मुसलामानों की बर्बर सेना ने सभी हिन्दू धर्मों ,संप्रदायों ,मठ और मंदिरों को नष्ट करने का अभियान चलाया .


४. साहित्यिक परिस्थिति - 

आदिकाल काल में कवियों पर अत्यधिक उत्तरदायित्व था . वे कवि और सैनिक दोनों थे , एक ओर तो कवि जन - जन में वीरता की भावना भरते थे तो दूसरी ओर अपने हाथों में तलवार ग्रहण करके युध्य में सबसे आगे जाते थे . इस काल में कवि चारण वृत्ति वाले होते थे . इनकी कविताएँ अतिशयोक्ति होती थी जिनमें आश्रयदाताओं की बढ़ा - चढ़ा कर प्रशंसा रहती थी . देश ,समाज आदि इस काल के साहित्य में नगण्य थे .


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