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नेता और अभिनेता

रविवार को मैं देर से उठता हूं । उसदिन  मार्निंग वाक पर भी नहीं जाता । मेरा हिसाब बहुत ही सीधा है-सप्ताह में छह दिन वाक, रविवार को आराम । भगवान ने  भी शायद सप्ताह में छह दिन इस दुनिया  को बनाने में लगाया
नेता
होगा और रविवार को आराम किया होगा । लेकिन रेस्ट डे का सत्यानाश करने उसदिन सुबह-सुबह नवघन हाजिर हो गया ।  मेरे घर पहुंच कर मेरी बीवी को दो कप चाय बनाने का आर्डर देकर मुझसे कहता है, मुझे एक रास्ता बता ।
-मैं तुझे क्या रास्ता बताऊं ? तू तो सारी दुनिया को पढ़ाता है । प्रोफेसर है तू ।
-देख, प्रोफेसर को भी कभी-कभी पढ़ना पड़ता है । कालेजों में जाकर देख, अध्यापक भी लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ते नजर आएंगे ।
-अच्छा बोल, कौन सा रास्ता बताऊं तुझे ?
-मैं सोच रहा हूं राजनीति करूं । कोई पार्टी जॉइन  कर लूं ।
-हां बिलकुल कर...किसने मना किया है । भारत एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र है । इस देश में सड़क पर मूतने से लेकर केले का छिलका फेंकने तक सबकुछ करने का अधिकार है ।
-आजकल रोज नई पार्टिंया बनतीं हैं । विचारों को उम्मीदवार नहीं मिल रहे । वैसे किसी पार्टी में शामिल हो जा । नहीं तो खुद अपनी पार्टी बना ले ।
-वैसा नहीं हो सकता । किसी बड़ी पार्टी का नेता न होने पर कोई फायदा नहीं ।
-किसी बड़ी पार्टी का नेता बनने के लिए पहले से ही लम्बी कतारों में खड़े हैं लोग ।
-तो मैं क्या करूं...तू उन पार्टियों के नेताओं से मिल । आजकल किसी पार्टी में नीचले स्तर पर कुछ नहीं होता । जो होता है सभी अालाकमान करते हैं ।
-यह बात आजकल छोटे बच्चों को भी मालूम है ।
-सुन!  एेसा रास्ता  बता कि मुझे टिकट मिल जाए ।
नवघन का निराश चेहरा देखकर मैंने सोचा कि उसे कुछ सलाह देना मेरी जिम्मेदारी है । उससे मैंने कहा, एक रास्ता है ।
नवघन ने उत्साहित होकर पूछा , क्या ?
-अच्छा तू कभी टिवी-विभी पर नजर आया है ?
-नहीं ।
-ड्रामा या थिएटर में कुछ किया है ?
हां-स्कूल में एक बार नाटक  किया था । उसके बाद मुझे किसीने मौका नहीं दिया ।
-एक बार किया है न...बस ! उसमें काम हो जाएगा ।
तू जाकर आलाकमान से बोल कि मैं अभिनेता हूं । फिर देखना क्या होता है...
सच कह रहा है...
-और क्या? तमिलनाडु और आन्ध्र प्रदेश में तो अभिनेता ही नेता है । उत्तर और पश्चिम भारत में भी यह ट्रेंड शुरू हो गया है । पश्चिम बंगाल में ममता दीदी ढूंढ-ढूंढ कर अभिनेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर रही हैं वहीं ओडिशा में भी आजकल अभिनेता नेता बनना चाहते हैं ।
-सही बोल रहा है। मैं भी जाकर कहूंगा कि मैं अभिनेता हूं ।
-देख, अभिनेता और नेता में  ज्यादा फर्क नहीं । दोनों में नाटक करना जरूरी है । असली चेहरा किसे दिखाना है । सभी मुखौटा लगाकर घूमते हैं ।
सबसे बड़ी बात, अभिनेताओं के मुकाबले नेता अच्छा अभिनय भी  कर लेते हैं । ...और एक बात भी है । लोग अब नेताओं के सड़े हुए चेहरे देख- देख कर थक चुके हैं । थोड़ा स्मार्ट चेहरा हो तो आंखों को आराम मिले । अभिनेताओं को देखने के लिए लोगों की भीड़ भी जमी रहेगी ।
तभी नवघन ने कहा कि लेकिन मैंने तो ज्यादा अभिनय नहीं किया । स्कूल में ड्रामा में एक बार हिस्सा लिया था । मैं क्या कर सकता हूं... ?
मैंने कहा तू कर सकता है । अरे ! हम सभी कभी न कभी अभिनय करते ही हैं । तूने शादी की है ।  तुझे क्या हर बात समझाना जरूरी है ! दुनिया में एेसा कौन शादीशूदा आदमी है जिसने कभी अपनी बीवी के सामने नाटक नहीं किया होगा ! तू कर सकता है । बढ़ता जा आगे । हम तेरे साथ हैं । आलाकमान से जाकर अपनी बात कर । नवघन के जाने के बाद मेरी बीवी ने मुझसे पूछा कि तुमने उन्हें चने के झाड़ पर क्यों चढ़ा दिया ?
-ह्वाट डू यू मिन बाए चने के झाड़ पर चढ़ाना ?  अरे! राजनीति  में शामिल होना हर जिम्मेदार नागरिक का कर्त्तव्य है ।
-वह सब फालतू बातें बाद में कीजिएगा। आपका मतलब क्या है...?
-अरे ! तुम समझ नहीं रही । अगर बाइचान्स उसे किसी पार्टी ने टिकट दे दिया और उसके बाद वह जीत गया तो, भारत में कुछ भी हो सकता है न ! तुम्हें पता है अगर अपनी पहचान वाला कोई विधायक या सांसद बन जाए तो ...कितना फायदा है ...जानती हो, कुछ न हो तो न सही यह तो कह ही सकते हैं कि मेरा दोस्त सांसद या विधायक है...पूरे इलाके में हमारी धाक बढ़ेगी...

- डा.मृणाल चटर्जी 
ओड़िया से अनुवाद इतिश्री सिंह राठौर

डा.मृणाल चटर्जी फिलहाल भारतीय जनसंचार संचार पूर्वी क्षेत्र के आंचलिक निदेशक हैं । डा. चटर्जी ओडिशा के जानेमाने लेखक और प्रसिद्ध व्यंगकार हैं । 

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