0
Advertisement

मिलजुल ऐसा समाज बनाएं


देश में फैली कुरीतियां मिटाकर
कुसंस्कृतियों को जड़ से हटाकर
सभी धर्मों को साथ मिलाकर 
समाज
समाज
आओ धर्म मानवता का बसाएं।
आओ मिलजुल ऐसा समाज बनाएं।

सभी मिलजुल जीवन जीएं
क्लेश का न हो नामोनिशान,
किसी को कोई नही सताए
झूठी दलीलों से न भरमाए।
आओ मिलजुल ऐसा समाज बनाएं।

गरीबी में पिसे नही कोई
जगे सबमें सहिष्णुता सोई,
पिशाच बनकर यहां कोई 
नहीं दुर्बल जन को सताए।
आओ मिलजुल ऐसा समाज बनाएं।

नही कोई अमीरी घमंड में फूले
सभी को समान अधिकार मिले,
सबका हो समाजोचित व्यवहार 
किसी का कभी न पांव डगमगाए।
आओ मिलजुल ऐसा समाज बनाएं।

नही कोई व्याभिचारी बन कर
नारी अस्मत का मजाक बनाएं
नही कोई नारी ही शूर्पणखा बन 
रावण जैसा अत्याचारी भड़काए ।
आओ मिलजुल ऐसा समाज बनाएं।

न हो बेटा-बेटी में भेदभाव
सबसे रखें सब प्रेम सदभाव
जात-पात का भेद मिटाकर
इंसानियत से सबको अपनाएं।
आओ मिलजुल ऐसा समाज बनाएं।

यहां नहीं हो कठोरता का वास
निर्मल स्वभाव का हो सबमें प्रवास
अज्ञान रूपी निर्जीवता मिटाकर
ज्ञान रूपी सजीवता का बीज उगाएं।
आओ मिलजुल ऐसा समाज बनाएं।


रेणु रंजन
(शिक्षिका )
रा0प्रा0वि0 नरगी जगदीश 'यज्ञशाला'
सरैया, मुजफ्फरपुर  (बिहार)
मो0 नंबर - 9709576715

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top