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होली 2018

होली रंगों का त्यौहार है। ये पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है।प्रकृति भी एक तरह से इस त्यौहार में सम्मिलित होती है।चारों ओर रंग - बिरंगे बिखेर कर वसंत ऋतू खुशियाँ लुटाती है।  यह त्यौहार मौसम और रंगों के अनुकूल होता है।  

होली की पौराणिक कथा - 

होली के साथ एक पौराणिक कथा जुडी हुई है।प्राचीन काल में हिरण कश्यप नाम का एक असुर था।  उसका पुत्र
होली
होली 
प्रह्लाद ईश्वर का भक्त था।इस कारण हिरण कश्यप अपने पुत्र को मरवा देना चाहता था।इसके लिए उसने अनेक प्रयास किये ,किन्तु ईश्वर कृपा से प्रह्लाद हर बार बच जाता गया।हिरण - कश्यप की होलिका नाम की एक बहन थी।उसे वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि  में नहीं जलेगी।हिरण कश्यप के कहने से होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गयी।आग जलने पर प्रह्लाद बच गया ,किन्तु होलिका जल गयी।इसी घटना की याद में इस दिन प्रति वर्ष होली मनाई जाती है। 
भारत कृषि प्रधान देश है।प्रायः इसके त्यौहार का सम्बन्ध खेती से जुड़ा हुआ है।  होली का त्यौहार रबी की फसल तैयार होने पर मनाया जाता है।  इस समय किसान धन - धान्य से संपन्न रहते हैं। इसी ख़ुशी में होली मनाई जाती है।इस कारण भी होली का त्यौहार मनाया जाता है।  

होलिका दहन 2018 / होलिका दहन का शुभ मुहूर्त - 

होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है।इस वर्ष 1 मार्च को सुबह 8 बजकर 58 मिनट से पूर्णिमा तिथि लग रही है।इसलिए शाम 7.30 मिनट तक भद्रा के खत्म होने पर होलिका दहन किया जा सकेगा। तथा २ मार्च २०१८ को होली का त्यौहार मनाया जाएगा . गाँवों में वसंत पंचमी से ही होली मनाने का वातावरण बनना प्रारम्भ हो जाता है।  किसी मैदान या खुली जगह में गाँव के बच्चे कई दिन पहले से ही लकड़ियाँ ,  घास - फूस ,उपले आदि इकट्ठे करने लगते हैं। पूर्णिमा के दिन शाम को शुभ लग्न में होली जलाई जाती है।  होलिका दहन से पहले पूजा की जाती है।  जब होलिका जलने लगती है तो लोग उसकी परिक्रमा करते हैं।  इसी समय लोग होली भी गाते हैं। खेतों से नया अन्न लाकर होलिका की आग में सेंकते - भूनते हैं और उसे खाते हैं।  यह एक शुभ कार्य माना जाता है।  होलिका की भस्म लगाते हैं और हाथ जोड़कर प्रणाम करैत हैं।  

होली 2018 कब है - 

होलिका दहन के दूसरे दिन अर्थात चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को होली खेली जाती है।होली इस वर्ष 2 मार्च 2018 को है। प्रातः काल से रंग अबीर की धूम मच जाती है। ऊँच - नीच ,जाति - पाँति का भेद - भाव भूलकर लोग एक दूसरे पर रंग फेंकते और अबीर लगाते हैं।  लोग चारों ओर ढ़ोल ,मजीरे ,चंग ,तासे ,झाँझ बजाते और गीत गाते हैं। चारों ओर आनंद और उमंग का वातावरण छा जाता है।अमीर - गरीब सभी अपने सामर्थ्य के अनुसार अच्छा अच्छा भोजन करते हैं।  मेहमानों को मिठाइयाँ खिलाते हैं और प्रेम पूर्वक गले लगते हैं।  इस त्यौहार पर सभी अपने भेद - भाव भूलकर आपस में प्रेमपूर्वक मिलते हैं।  इससे वर्ष भर का राग द्वेष और मलाल दूर हो जाते हैं तथा शुभकामनाएँ देते हैं। 

होली का संदेश - 

होली प्रेम  चारे का त्यौहार हैं।इस दिन सबके मन से मैल दूर हो जाते हैं।होली भेद भाव दूर कर आपस में प्रेम और भाई चारे का सन्देश देती है।  साथ ही वह यह भी बताती है कि सत्य और ईश्वर - भक्ति की सदा जीत होती हैं।  यह हँसी - ख़ुशी ,आनंद - मस्ती का त्यौहार है।  इसे मनाने के बाद हममें नयी स्फूर्ति और शक्ति पैदा होती है।  

  • इस वर्ष 1 मार्च को सुबह 8 बजकर 58 मिनट से पूर्णिमा तिथि लग रही है। इसलिए शाम 7.30 मिनट तक भद्रा के खत्म होने पर होलिका दहन किया जा सकेगा।होलिका दहन गुरुवार, 1 मार्च होलिका दहन 2018 (भारत) को मनाया जाएगा . 
  • होली इस वर्ष 2 मार्च 2018 को है।होलिका दहन के दूसरे दिन अर्थात चैत्र कृष्ण प्रतिपदा २ मार्च को पड़ रही है ,इसीलिए २ मार्च २०१८ को होली का त्यौहार मनाया जाएगा . 


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