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बच्चों की शिक्षा


पहले एक पिता बेटी जन्मने से इसलिए डरता था कि उसे बेटी के लिए दहेज जमा करना पड़ेगा अब डरता है इस बात से कि उसकी बेटी इस समाज में कैसे जीएगी जहाँ हर समय एक लड़की पीड़िता बनकर जी रही है । कहीं
बच्चों की शिक्षा
लड़की का रेप करके उसे मरता सड़क पर छोड़ दिया जाता है कभी मार दिया जाता है कभी जिंदा लाश सी छोड़ दिया जाता है , हर मोड़ पर छेड़छाड़ , कभी अकेले में तो कभी भरी भीड़ में छेड़छाड़ , भरी हुई बसों में अश्लीलता, बाहर तो बाहर घर में भी नहीं है सुरक्षित , कभी चाचा ताऊ, चचेरा  ममेरा भाई , कभी अपने ही सगे भाई कुकर्म करते हैं। 
तो क्या इसका कारण लड़की का जन्म लेना ही है या लड़कियों का छोटे कपड़े पहनना या अंधेरे में उसका घर से निकलना और हल है बेटी का जन्म न होना लड़कियों को पूरी तरह से कपड़ो से पैक होकर निकलना , अंधेरा होने से पहले घर वापिस आना वगैरह वगैरह लेकिन जो साड़ी और सूट सलवार पहनने वाली लड़कियां है वो क्यों इनका शिकार होती हैं । और जो लड़कियाँ घर में ही नोची खसोटी जा रहीं हैं उनका क्या वे क्या करें । दिन दहाड़े लोगों के सामने लड़कियों के साथ अश्लील हरकतें हो रही है उस वक़्त लोगों का ज़मीर कहाँ चला जाता है वो बेटी के प्रति जो डर है वो कहाँ जाता है क्यों मन में यह रहता है कि कौनसा ये मेरी बेटी है होने दो जो हो रहा है दूर ही रहो इन फालतू के झमेलों से । एक बात जान लो ये सब रोकने का हल बेटियों को न जन्म देकर या उनको कंट्रोल में कर के नहीं मिलेगा बदलना होगा हमें अपनी सोच को अपनी समझ को । 
जहाँ हम अपनी बेटियों को कपड़े पहनने के ढंग , समय पर घर आने , किसी की अश्लील हरकतों को नज़रअंदाज़ करने, सहनशील बनने आदि का ज्ञान देतें हैं उसकी जगह हम अपने बेटों के मन में दिमाग में लड़कियों के प्रति सम्मान और बराबरी का भाव डालें , बेटों की छोटी छोटी गलतियों पर बेपरवाही न बरतें (कई बार यह छोटी गलतियां गुनाह बन जाती हैं )तो स्थिति बदल सकती । बेटियां क्या पहनकर जा रहीं हैं, कहाँ जा रहीं हैं कब लौट रहीं हैं आदि पर ध्यान देने की बजाय इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हमारा बेटा तो कोई ऐसा काम नहीं कर रहा जिससे किसी लड़की को ठेस पहुंच रही हो । 
मैं ऐसा नहीं कहती कि जो पाबंदियां बेटी पर लगाई जाती हैं वो बेटों पर लगा दी जाए पाबंदी कभी किसी को सुधारती नहीं हैं जिस तरह रेत को मुट्ठी में बांध कर नहीं रखा जा सकता वैसे ही पाबन्दियों से बच्चों को बांधने की हमारी सोच गलत है । अपने बच्चों को सही शिक्षा देना हमारा कर्तव्य है जिसके माध्यम से समाज की बुराइयों को दूर किया जा सके।

  



                                                                                                                                              - तृष्णा सागर

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  1. तृष्णा सागर जी
    मैं आपकी प्रत्यक रचनाओं को पढ़ता हूँ।
    आपकी हर रचना मूर्त जीवन की सच्चाइयों से जूड़ी होती हैं और साथ ही सामाजिक कुरीतियों को समाज के समुख रखती है
    आपका प्रिय पाठक।।

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