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ठण्ड 

सूरज मद्दिम सा हुआ ,मौसम सिसकी लेय।
कुहरा नाचे मोर सा ,ठण्ड ठहाका देय।

मौसम ठिठुरा ठण्ड में ,चला रजाई ओढ़।
ठण्ड
ठण्ड
सूरज अस्ताचल छुपा ,ठण्ड पड़ी मुहतोड़।

गरम पकोड़े तल रही ,बीबी मन मुस्काय।
गरम जलेबी देख कर ,मुख में पानी आय।

भीनी भीनी धूप में मन चंचल हो जाय।
प्यारी प्यारी धूप जब तन मन को सहलाय।

मोती जैसी ओस है चांदी जैसा नीर।
स्वप्न सुनहरे जम गए हवा लगे शमशीर।

ठण्ड ठिठुरती रात में जाड़ा दिन में रोय।
कुहरा बैठा ताक में ,शाम ठिठुरती सोय।

हवा लगे शमशीर सी नीर लगे तन रोय।
बाथरूम बैरी लगे कैसे तन को धोय।

मोज़े स्वेटर पहन कर ढके मुंदे सब लोग।
उछल कूद बच्चे करें खा कर छप्पन भोग।

जाड़े के दिन सुखद हैं मन प्रसन्न मुस्काय।
मन इच्छित भोजन करो शुभ यात्रा पर जाय।


- सुशील शर्मा 

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