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सती कहानी शिवानी 
Sati Story by Shivani in Hindi

सती कहानी शिवानी पाठ का सार summary of sati - सती कहानी शिवानी जी द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध कहानी है।  प्रस्तुत कहानी में आपने यात्रा के समय सावधानी बरतने के सलाह दी है।  कहानी का प्रारम्भ प्रयाग स्टेशन के खचाखच भीड़ से होती है।  लेखिका को गाड़ी पकड़नी थी ,वह रिजर्वशन स्लिप पर अपना नाम देखकर गाड़ी में चढ़ जाती है। जिस डिब्बे में लेखिका चढ़ती है ,उसमें तीन महिलाएँ भी थे।उनमें एक पंजाबी महिला थी ,जिसके पति की भारत विभाजन के समय में हत्या कर दी गयी थी।वर्तमान में वे आश्रम की संचालिका है।वे जासूसी उपन्यास पढ़कर अपनी यात्रा को मनोरंजक बनाने जा रही थी।दूसरी ओर एक महिला अपनी वेश -भूषा से महाराष्ट्री लग रही है।  उन्होंने वार्तालाप द्वारा अपना परिचय नहीं दिया।उनके सामान पर लगे लेबल से पता चला कि वह मेजर जनरल बनोलकर की पत्नी है।  वह एक मराठी पत्रिका पढ़ रही थी।
लेखिका स्वयं कम सामान लेकर चल रही थी। सामान के नाम पर उनके पास मात्र एक बटुवा था।  गाड़ी के सीटी देते ही एक महिला का प्रवेश होता है।उनके हाथ में बेंट की बानी एक छोटी टोकरी तथा बगल में एक बैग लटकाये थी।उसका कद ६ फुट और साढ़े दस इंच था।उसने अपने परिचय देते हुए कहा कि उसका नाम मदालसा सिघड़ियाँ है।  वह कल ही प्रिटोरिया से भारत आयी है।अपने मृत पति के लिए वह सती होने आयी है।  उसने बताया कि पिछले वर्ष पर्वतारोही दल के साथ मेरे पति भारत आये थे।  तूफ़ान के नीचे दब जाने से उनकी मृत्यु हो गयी।इसिलए वह भारत में सती होने आयी है।तीनो महिलाएं उनकी बातें सुनकर हैरान रह गयी । पंजाबी महिला ,जो कि समाज सेविका थी ,उसने उसे समझाने की कोशिश की।पति के अंतिम संस्कार के बाद पंजाब स्थित अपने आश्रम में आने के  लिए कहा।इस प्रकार मदालसा ने कहा कि मुझे ब्रह्मा  भी सती होने रोक नहीं सकते हैं।उसकी नानी और माँ भी सती हुई थी।  अतः सती होना उसके परिवार की परंपरा है।  गुशलखाने में हाथ मुँह धोने के बाद मदालसा ने सबको खाने के लिए निमंत्रित किया।  उसने अपना टिफिन निकाल सबको खिलाया।कचौड़ियाँ ,रायता , चटनी और मेवा जड़े लड्डू देखकर सभी ने खूब छककर खाया।  खाना खाने के बाद उसने सबको केवड़ा ,इलाइची और सुपारी से भरा पान खिलाया।  खाना खाने के बाद महिलाओं में सटी प्रथा को लेकर बहस छिड़ गयी। थोड़ी देरी सबको नींद आने लगी।  मदालसा ने सबको गुड नाईट कहा। तीनों महिलाएँ गहरी नींद में सो गयी और तरह - तरह के सपने देखने लगी।जब सुबह सबकी नींद खुली ,तो देखा कि मदालसा गायब है।सबका सामान लेकर वह गायब हो गयी है।समाज सेविका का सेविका का सूटकेस ,जिसमें आश्रम के दस हज़ार रुपये थे। मराठी महिला के स्टील के बक्स ,जिसमें सोने के हार थे।लेखिका के बटुए में पचपन रुपये और एक फर्स्ट क्लास की वापसी का टिकट था।  चैन खींचकर किसी प्रकार गाड़ी को रोका गया।  समाज सेविका ने पुलिस को खबर की ,लेकिन उस चोरनी का कहीं पता नहीं लगा।



सती कहानी शिवानी पाठ का उद्देश्य /story sati by shivani  -

प्रस्तुत कहानी सती में शिवानी जी ने आम जनता को जागृत करने का प्रयास किया है. यात्रा के समय ,सहयात्रियों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।  उनके द्वारा दिए गए खाद्य पदार्थ पर सावधानी से नज़र रखनी चाहिए।  हम आये दिन समाचार पत्रों में इस तरह की ख़बरें पढ़ते हैं ,लेकिन फिर भी सजग होने का प्रयास नहीं करते हैं।  प्रस्तुत कहानी में तीन महिलाएँ प्रयाग स्टेशन से अपने गंतव्य के लिए ट्रैन में बैठती हैं।  तभी एक मदालसा नाम की युवती आती है।  वह अपने पति की मृत शरीर लेने के लिए प्रिटोरिआ से भारत आयी है।अपने पति की मृत शरीर के साथ ही वह सती होगी।  अन्य सहयात्री महिलाएँ उसकी बातों में आ जाती है।वह सभी महिलाओं को कचौड़ियाँ ,रायता ,चटनी ,लडडू खिलाती है।  साथ ही केवड़ा ,इलाइची और सुपारी से मिश्रित पान खिलाती है।  यह सब खा कर सभी महिलाएँ गहरी नींद में सो जाती है और इसी बीच मदालसा ,सबके सामान को लेकर चम्पत हो जाती है।  
इस प्रकार लेखिका ,पाठकों को यह समझाना चाहा है कि इस प्रकार की महिलाओं से सावधान रहना चाहिए। ये महिलाएँ अन्य लोगों को रूढ़ियों के नाम पर सहानुभूति बटोरती है और मूर्ख बनाकर धन -सामान लूटकर चम्पत हो जाती है।  
कहानी के अंत में हम यह पाते हैं कि समाज सेविका जिस मदालसा को सती होने से बचाने के लिए कह रही थी ,वह अंत में गुस्से से सती की बच्ची कहती है और पुलिस में रिपोर्ट करती है।अतः लोगों को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए और मदालसा जैसी महिलाओं से झाँसे में नहीं आना चाहिए।  


सती कहानी शिवानी शीर्षक की सार्थकता  - 

सती कहानी शिवानी जी द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध कहानी है।  प्रस्तुत कहानी में आपने यात्रा के समय सावधानी बरतने के सलाह दी है। सती कहानी का शीर्षक पढ़ते ही ,हमारे मन में यह प्रश्न उठता है कि सती कौन कौन है ? और आज के समय में कौन सती होने जा रहा है।  प्रयाग स्टेशन में तीनों महिलाएँ अपने गंतव्य में रवाना होती है। इसी बीच चौथी महिला मदालसा आती है।  वह सती हो जाने का ढोंग रचती है।  सहयात्री महिलाएँ को उससे सहानुभूति हो जाती है।  इसी प्रकार वह सहयात्री महिलाओं को खाद्य पदार्थ खिलाती है।  खाद्य पदार्थ खाते ही सबको नींद आने लगती है और वह सबका सामान लेकर चम्पत हो जाती है। इसीलिए यात्रा के समय ,सहयात्रियों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।  उनके द्वारा दिए गए खाद्य पदार्थ पर सावधानी से नज़र रखनी चाहिए। 
कहानी का शीर्षक बहुत सरल ,संक्षिप्त व पाठकों की जिज्ञासा को जागृत करने वाला है। पाठक की उत्सुकता बानी रहती है।अंत में मदालसा को समाज सेविका द्वारा सती की बच्ची कही जाती है, जो कि सबको चकमा देकर गायब हो जाती है।अतः सती शीर्षक सार्थक व उचित है।

विडियो के रूप में देखें -



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